UP Politics: UP BJP में ‘बड़े फेरबदल’ की तैयारी! कैबिनेट विस्तार-पंकज चौधरी की नई टीम पर मंथन तेज, किसकी होगी एंट्री-किसका कटेगा पत्ता?

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UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें जोर पकड़ रही हैं। इसी कड़ी में भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े रविवार को लखनऊ पहुंच रहे हैं, जहां उनकी अहम बैठकों का दौर प्रस्तावित है। इस दौरान उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ होगी।

बताया जा रहा है कि इन बैठकों में संगठन के ढांचे में बदलाव, विभिन्न मोर्चों के पुनर्गठन और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम के गठन पर भी फैसला लिया जा सकता है। (UP Politics) पार्टी सूत्रों के अनुसार, यदि पहले मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो संगठन के कुछ प्रमुख चेहरों को सरकार में शामिल किया जा सकता है, जिससे संगठन में नए लोगों को मौका मिलेगा। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दावेदारों की सूची लंबी बताई जा रही है, लेकिन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।

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इसके अलावा संगठन से दो अन्य नेताओं को भी सरकार में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं एक पूर्व मंत्री भी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिनके दिल्ली से जुड़े राजनीतिक समीकरण अब काफी हद तक सुधर चुके हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस बार बहुत बड़ा फेरबदल होने की संभावना कम है। (UP Politics) कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव जरूर किया जा सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले 5 मार्च 2024 को मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था। उसके बाद दो पद खाली हो गए थे, क्योंकि जितिन प्रसाद और अनूप प्रधान वाल्मीकि सांसद चुने जाने के कारण मंत्री पद छोड़ चुके हैं।

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वर्तमान स्थिति की बात करें तो उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में कुल 60 मंत्रियों का प्रावधान है, जबकि अभी मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 54 सदस्य ही हैं। इनमें 21 कैबिनेट मंत्री, 14 स्वतंत्र प्रभार और 19 राज्यमंत्री शामिल हैं। इस तरह अभी भी 6 पद खाली हैं, जिन्हें भरा जाना बाकी है। इसके अलावा करीब तीन दर्जन आयोगों, निगमों और बोर्डों में भी नियुक्तियां लंबित हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को खास ध्यान में रखा जाएगा। (UP Politics) वर्तमान में योगी सरकार में पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभाव ज्यादा है, ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष सभी पूर्वांचल से आते हैं।

फिलहाल संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर मंथन जारी है। कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही होगा। (UP Politics) बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान इस समय पश्चिम बंगाल के चुनाव अभियान में व्यस्त है, जिसके कारण यूपी से जुड़े फैसलों में थोड़ी देरी हो सकती है। जैसे ही हाईकमान से हरी झंडी मिलेगी, मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलाव की सूची सामने आ सकती है।

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