आगरा। आगरा से 5 बार छावनी उपाध्यक्ष रहे डॉ. पंकज महेंद्रू की क्वार्टर नंबर-9 में 1996 में एंट्री हुई। 14 अप्रैल, 1996 को नसीम और रईसउद्दीन ने छावनी उपाध्यक्ष डॉ. पंकज महेंद्रू और उनके भाई अरुण महेंद्रू के नाम बंगले की रजिस्ट्री की थी। इसके बाद पंकज महेंद्र के भाई अरुण ने अपनी लीज पंकज महेंद्रू को ट्रांसफर कर दी। इसके बाद 2010 तक डॉ. पंकज के नाम पर बंगला रहा। डॉ. पंकज महेंद्रू ने फरवरी, 2010 में अपने बेटे करन और शिव महेंद्रू के नाम बंगला कर दिया। आगरा के छावनी उपाध्यक्ष रहे डॉ. पंकज महेंद्र ने क्वार्टर नंबर-9 को अपने बेटे करन और शिव महेंद्र को ट्रांसफर कर दिया था।
पहले भी हो चुकी है जांच
इस फजीर्वाड़े की शिकायत रक्षा मंत्रालय से हुई थी। इस पर 1999 में तत्कालीन रक्षा संपदा अधिकारी राजीव शर्मा ने इसकी जांच की। अपनी जांच में उन्होंने कलावती के बेटे केएम भटनागर को प्रॉपर्टी का सही मालिक नहीं माना। उन्होंने जमीन के सौदे को भी अवैध बताया। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने लिखा कि जब जमीन का सौदा करने वाले पुराने मालिक ही सही नहीं थे। उसके बाद जिन्होंने भी जमीन खरीदी, वो कैसे सही हो सकते हैं। हालांकि अब रक्षा संपदा विभाग का कहना है कि पुराने म्यूटेशन नियमानुसार हुए थे। मगर, ब्रिगेडियर की जांच रिपोर्ट में इस पर सवाल खड़े किए गए हैं।
छावनी उपाध्यक्ष बोले- सब नियम के हिसाब से हुआ
क्वार्टर नंबर-9 की रजिस्ट्री निरस्त करने के आदेश के संबंध में जब रजिस्ट्री में लिखे डॉ. करन महेंद्रू के नंबर पर फोन किया तो फोन उनके पिता निवर्तमान छावनी उपाध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने उठाया। अपने दोनों बेटों की ओर से उन्होंने इस मामले में कहा कि उनके द्वारा रक्षा संपदा विभाग से अनुमति ली गई है। उनकी ओर से नियमानुसार लीज ट्रांसफर की गई है। ये रक्षा संपदा विभाग का अधिकार है कि वो क्या कार्रवाई करता है।
तत्कालीन एसएसपी बबलू कुमार ने जांच के लिए लिखा था पत्र
आगरा के तत्कालीन एसएसपी बबलू कुमार ने 23 अगस्त 2020 को छावनी उपाध्यक्ष के खिलाफ जांच के लिए लेटर लिखा था। लेटर में ररढ ने पंकज को घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है।
नियमानुसार होगी कार्रवाई: डीएम
मामले में आगरा के जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल का कहना है कि मामला उनसे पहले का है। इसकी जानकारी कर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट – अनुराग रावत













