Avimukteshwaranand Controversy: अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में प्रशासन ने तोड़ी चुप्पी! बताया पूरी घटना का असली सच, खुल गए बड़े राज

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Avimukteshwaranand Controversy: प्रयागराज की पावन धरती पर चल रहे महाकुंभ के बीच एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे देश के श्रद्धालुओं और संतों में आक्रोश भर दिया। सोशल मीडिया पर यह खबर आग की तरह फैल गई कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम स्नान करने से रोक दिया गया है। संतों के साथ बदसलूकी और पिटाई के आरोपों ने माहौल को और भी गरमा दिया। लेकिन अब इस पूरे मामले में प्रयागराज प्रशासन ने सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है और जो सच बताया है, उसने इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। (Avimukteshwaranand Controversy) आखिर मौनी अमावस्या की उस दोपहर क्या हुआ था? क्या वाकई किसी संत को गंगा स्नान से रोका गया या फिर इसके पीछे कोई और कहानी है? आइए जानते हैं प्रशासन की जुबानी इस विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी।

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Avimukteshwaranand Controversy: स्नान से नहीं बल्कि ‘गाड़ी’ ले जाने से रोका गया

मेला प्राधिकरण के आईसीसीसी सभागार में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने स्थिति साफ की। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल और पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान करने से कतई नहीं रोका गया था। (Avimukteshwaranand Controversy) प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक भ्रम फैलाया जा रहा है। असल में विवाद वाहन यानी गाड़ी को लेकर था। मौनी अमावस्या जैसे भीड़भाड़ वाले दिन सुरक्षा कारणों से किसी भी वाहन को संगम के पास ले जाने की अनुमति नहीं थी। प्रशासन ने स्वामी जी से अनुरोध किया था कि वे वाहन से उतरकर पैदल स्नान के लिए जाएं, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। तीन घंटे तक अधिकारियों के समझाने के बाद भी बात नहीं बनी, जिससे मेले की व्यवस्था में व्यवधान पैदा हुआ।

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बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े समर्थक

पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बेहद गंभीर खुलासा करते हुए बताया कि पीपा पुल नंबर दो को सुरक्षा के मद्देनजर एक दिन पहले ही बंद कर दिया गया था। जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन आरोप है कि उनके समर्थकों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी और जबरन आगे बढ़ने का प्रयास किया। (Avimukteshwaranand Controversy) प्रशासन अब इस पूरी घटना की सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा है और साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है। जहां तक साधु-संतों की पिटाई का सवाल है, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और शंकराचार्य का प्रोटोकॉल

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। मेलाधिकारी ऋषिराज ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य वाला प्रोटोकॉल क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ‘शंकराचार्य’ के रूप में प्रोटोकॉल देने पर रोक लगाई गई है। (Avimukteshwaranand Controversy) इसी अदालती आदेश का पालन करते हुए उन्हें मेले में ‘शंकराचार्य ज्योतिषपीठ’ के बजाय ‘बद्रिका आश्रम सेवा शिविर’ के नाम पर जमीन दी गई है। पूरी प्रेसवार्ता के दौरान अधिकारी उन्हें ‘स्वामी’ कहकर ही संबोधित करते रहे, जो इस विवाद की गहराई को दर्शाता है।

प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या पर करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता थी और किसी भी व्यक्ति को नियम तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती, चाहे वह कितना ही रसूखदार क्यों न हो।

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