Swami Avimukteshwaranand: प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजा था, जिसमें उनसे यह पूछा गया था कि वे खुद को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण के नोटिस का जवाब दिया है, जो 8 पन्नों का है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस जवाब को मेला प्राधिकरण के मेल आईडी के साथ-साथ सेक्टर-4 स्थित मेला प्राधिकरण के दफ्तर में भी भेज दिया। (Swami Avimukteshwaranand) जब अविमुक्तेश्वरानंद की टीम मेला प्रशासन को नोटिस का जवाब देने कार्यालय पहुंची, तो वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं था, जिसके बाद उनके अनुयायियों ने गेट पर ही जवाब चिपका दिया।
यह जवाब सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील अंजनी कुमार मिश्रा की ओर से भेजा गया है। वकील ने मेला प्राधिकरण के नोटिस को अपमानजनक और करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करने वाला बताया है। Swami Avimukteshwaranand) इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के वकील पीएन मिश्रा ने भी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से जवाब देते हुए कहा कि जिस सिविल अपील का हवाला मेला प्रशासन दे रहा है, उसमें 14 अक्टूबर 2022 का आदेश था, लेकिन उससे पहले 21 सितंबर 2022 का आदेश था, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के तौर पर मान्यता दी गई थी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक 12 अक्टूबर 2022 को हो चुका था, जबकि प्रशासन जिस आदेश का हवाला दे रहा है, वह 17 अक्टूबर 2022 का है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, और सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में शंकराचार्य शब्द का इस्तेमाल किया था। (Swami Avimukteshwaranand) इसलिए, मेला प्राधिकरण द्वारा भेजा गया नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने जैसा है, क्योंकि कोर्ट ने 17 अक्टूबर के बाद किसी भी पट्टाभिषेक पर रोक लगाई थी।
पीएन मिश्रा ने यह भी कहा कि वासुदेवानंद ने गलत एफिडेविट देकर आदेश प्राप्त किया था, और इस पर याचिका पहले ही दायर की जा चुकी है। (Swami Avimukteshwaranand) उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस भेजने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि उन्होंने भ्रम पैदा करने वाली कार्रवाई की है।














