Priyanka Gandhi: “राजनीति छोड़ो, हक दो!” प्रियंका गांधी का मोदी सरकार को खुला चैलेंज, कहा- “बुलाइए सत्र, हम पास कराएंगे महिला आरक्षण”

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Priyanka Gandhi: लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिरने के बाद देश की राजनीति में ‘आर-पार’ की जंग छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा विपक्ष पर ‘महिला विरोधी’ होने के आरोप लगाए जाने के बाद अब कांग्रेस की कद्दावर नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोर्चा संभाल लिया है। (Priyanka Gandhi) शनिवार को एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रियंका गांधी ने सीधे तौर पर मोदी सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार की नीयत वास्तव में महिलाओं को हक देने की है, तो वह सोमवार को ही पुराना महिला आरक्षण विधेयक सदन में पेश करे।

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Priyanka Gandhi: ‘सोमवार को संसद चलाइए, हम करेंगे समर्थन’

प्रियंका गांधी ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा, “जो विधेयक 2023 में सभी दलों की सहमति से पारित हुआ था, सरकार उसे लागू क्यों नहीं करती? सरकार को राजनीति छोड़कर पुराना महिला आरक्षण विधेयक लाना चाहिए। (Priyanka Gandhi) मैं चुनौती देती हूं कि सरकार सोमवार को ही संसद का सत्र बुलाकर वह बिल पेश करे, हम सभी विपक्षी दल मिलकर उसे उसी दिन पास करवा देंगे।” प्रियंका ने साफ किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा इसके साथ जोड़ी गई ‘परिसीमन’ और ‘जनगणना’ जैसी पेचीदा शर्तों के खिलाफ है।

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संसद में नंबर गेम और भाजपा का तीखा हमला

बता दें कि शुक्रवार को लोकसभा में मतों के विभाजन के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण बिल गिर गया। (Priyanka Gandhi) इसके बाद भाजपा ने इसे ‘ऐतिहासिक अवसर’ को गंवाने वाला कदम बताते हुए कांग्रेस और टीएमसी को आड़े हाथों लिया। गृह मंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि विपक्ष को इस ‘महिला विरोधी’ रवैये का परिणाम चुनाव में भुगतना पड़ेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी स्पष्ट कर दिया कि इस बिल के गिरने के बाद इससे जुड़े अन्य दो बिलों को भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

विपक्ष की दलील: ‘शर्तें हटाओ, हक दो’

विपक्ष का नेतृत्व कर रहे मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी का तर्क है कि सरकार ने बिना किसी सर्वदलीय बैठक और संवाद के यह बिल पेश कर दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह बिल महिलाओं को हक देने के लिए नहीं, बल्कि चुनावों का स्वरूप बदलने के लिए लाया गया था। वहीं, सपा सांसद डिंपल यादव ने ‘कोटे के अंदर कोटे’ की मांग दोहराते हुए कहा कि बिना इसके ओबीसी और पिछड़ी जाति की महिलाओं को न्याय नहीं मिल पाएगा। टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर सरकार 50 फीसदी आरक्षण का बिल लाए, तो पूरा विपक्ष बिना शर्त समर्थन कर देगा।

सियासी बिसात और 2029 की राह

प्रियंका गांधी की इस नई चुनौती ने अब गेंद पूरी तरह से सरकार के पाले में डाल दी है। भाजपा जहां इसे राज्यों के विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है, वहीं प्रियंका गांधी ने ‘पुराना बिल’ लाने की मांग करके यह संदेश देने की कोशिश की है कि रुकावट विपक्ष नहीं, बल्कि सरकार की अपनी शर्तें हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार प्रियंका की चुनौती स्वीकार कर कोई नया कदम उठाएगी या फिर यह मुद्दा सड़क पर होने वाली चुनावी रैलियों में ही सुलझेगा। एक बात तो तय है, महिला आरक्षण अब देश का सबसे बड़ा सियासी संग्राम बन चुका है।

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