BMC Election 2026: मुंबई की गलियों से लेकर मंत्रालय के गलियारों तक आज सिर्फ एक ही चर्चा है और वह है बीएमसी चुनाव के नतीजे (BMC Election Result 2026)। सुबह से ही टीवी स्क्रीन पर टिक-टिक करती घड़ियां, सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते हैशटैग और पार्टी दफ्तरों के बाहर जुटती भीड़ यह बता रही है कि मामला सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने का है। करीब नौ साल बाद हुए इस चुनाव ने पहले ही इतिहास रच दिया है और अब बारी है नतीजों की।
BMC Election 2026: सुबह 10 बजे से शुरू होगी गिनती, शाम तक तस्वीर साफ
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, मतगणना सुबह 10 बजे शुरू होगी और शाम 5 बजे तक अंतिम नतीजे आने की संभावना है। (BMC Election 2026) अधिकारियों का कहना है कि 2026 के इन चुनावों में मतदान का उत्साह 2017 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ चुका है। यही वजह है कि नतीजों को लेकर उत्सुकता चरम पर है।
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बीते दिन यानी 15 जनवरी को महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में कुल 893 वार्डों की 2,869 सीटों के लिए मतदान हुआ। (BMC Election 2026) 15,931 उम्मीदवार मैदान में थे और 3.48 करोड़ मतदाताओं ने उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला किया। यह आंकड़े अपने आप में बताते हैं कि यह चुनाव कितना बड़ा और निर्णायक रहा है।
BMC पर किसका दबदबा, सबसे बड़ा सवाल
देश की सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी पर सबकी नजरें टिकी हैं। 74,000 करोड़ रुपये के सालाना बजट वाली इस महानगरपालिका में 227 सीटों के लिए करीब 1,700 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन और ठाकरे बंधुओं के गठबंधन के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। (BMC Election 2026) मुंबई को छोड़कर बाकी शहरों में बहुसदस्यीय वार्ड प्रणाली है, लेकिन बीएमसी की सियासी अहमियत सबसे अलग है।
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एग्जिट पोल ने बढ़ाई हलचल
My Axis India के एग्जिट पोल के अनुसार, बीएमसी में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। (BMC Election 2026) अनुमान है कि यह गठबंधन 131 से 151 सीटों के साथ करीब 42 फीसदी वोट शेयर हासिल कर सकता है और इसमें सबसे बड़ा योगदान युवाओं का है।
वहीं उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और राकांपा (SP) के गठबंधन को 58 से 68 सीटें और लगभग 32 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि असली तस्वीर तो नतीजे ही बताएंगे।
राजनीति में बदले पारिवारिक समीकरण
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत रही बदले हुए राजनीतिक रिश्ते। करीब दो दशक पहले अलग हुए चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मराठी मतदाताओं को एकजुट करने के लिए फिर साथ आए। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में एनसीपी के प्रतिद्वंद्वी गुटों का गठबंधन भी चर्चा में रहा। इन नए समीकरणों ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया। अब हर नजर मतगणना पर है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि कौन जीतेगा, बल्कि यह भी कि क्या यह नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत करेंगे।















