Chandauli News: चंदौली जिले में स्वास्थ्य विभाग की हाईटेक व्यवस्थाओं की एक बार फिर पोल खुलती नजर आ रही है। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान झुलसी महिला की मौत ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका की पहचान रागिनी तिवारी के रूप में हुई है, जिन्हें 21 जनवरी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिजनों के अनुसार रागिनी तिवारी आग से झुलस गई थीं और उन्हें तत्काल उपचार की जरूरत थी। (Chandauli News) आरोप है कि अस्पताल में तैनात डॉक्टर शिवेंद्र सिंह ने इलाज के दौरान मरीज की गंभीर स्थिति के बावजूद कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। परिजनों का कहना है कि इलाज पूरी तरह जूनियर चिकित्सकों और स्टाफ के भरोसे चलता रहा, जबकि वरिष्ठ डॉक्टरों की मौजूदगी केवल कागजों तक सीमित रही।
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परिजनों ने बताया कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने मरीज में ब्लड की भारी कमी बताई। (Chandauli News) काफी मशक्कत के बाद जब परिजन ब्लड की व्यवस्था कर पाए तो मात्र पांच मिनट तक ही ब्लड चढ़ाया गया। इसके बाद ब्लड खराब होने की बात कहकर उसे रोक दिया गया। इस लापरवाही के बाद भी मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, लेकिन इलाज में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया।
आरोप है कि इस गंभीर लापरवाही को लेकर परिजनों ने जिला मजिस्ट्रेट के व्हाट्सएप नंबर पर लिखित शिकायत भी की थी, लेकिन उनकी फरियाद पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। समय रहते यदि शिकायत पर संज्ञान लिया जाता तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी।
इलाज के दौरान हालत अत्यधिक बिगड़ने पर आखिरकार रागिनी तिवारी ने दम तोड़ दिया। (Chandauli News) महिला की मौत के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए गए। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
इस घटना ने एक बार फिर चंदौली के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं, डॉक्टरों की जवाबदेही और हाईटेक दावों की सच्चाई उजागर कर दी है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।















