Congress Bihar Defeat: पहले आरजेडी में अंदरूनी कलह की खबरें सामने आ रही थीं, अब कांग्रेस में भी नेताओं का गुस्सा खुलकर दिखने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने पार्टी के संगठन और नेतृत्व पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस कागजों पर तो मजबूत दिखती है, लेकिन जमीन पर उसका संगठन कमज़ोर है।राशिद अल्वी ने कहा कि सिर्फ मीटिंग करने से पार्टी नहीं चलती। नेताओं को जमीन पर उतरकर काम करना चाहिए और संगठन को मजबूत बनाना चाहिए। (Congress Bihar Defeat) उन्होंने साफ कहा कि आज कांग्रेस की सबसे बड़ी दिक्कत बीजेपी की ताकत नहीं, बल्कि कांग्रेस का कमजोर संगठन है। उन्होंने पार्टी हाईकमान को भी सलाह दी कि कई पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से मुख्यधारा में लाना होगा, तभी स्थिति सुधरेगी।
Congress Bihar Defeat: बीजेपी और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
अल्वी ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस चुनाव में बीजेपी ने बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल किया। (Congress Bihar Defeat) इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और कहा कि आयोग की निष्पक्षता पर अब गंभीर संदेह हो रहा है। उनके अनुसार, बीजेपी और चुनाव आयोग ने मिलकर बिहार में चुनाव लड़ा है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि सिर्फ बीजेपी को दोष देने से कुछ नहीं होगा। कांग्रेस को अपनी कमियों पर भी विचार करना चाहिए और आत्ममंथन करना जरूरी है। (Congress Bihar Defeat) उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार गिरता जा रहा है, जो चिंता की बात है।
कांग्रेस के गिरते प्रदर्शन से बढ़ी बेचैनी
2020 के चुनाव में कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार पार्टी सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई। यह गिरावट पार्टी के भीतर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। महागठबंधन यानी इंडिया ब्लॉक को कुल 35 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए 202 सीटों के साथ भारी बहुमत से सत्ता में लौट आया। (Congress Bihar Defeat) कांग्रेस के अंदर कई नेता अब खुलकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी लगातार कमजोर हो रही है और नेतृत्व इसमें सुधार लाने में नाकाम साबित हो रहा है। बिहार में नतीजों के बाद पार्टी की रणनीति और फैसलों पर भी प्रश्नचिह्न लग गए हैं। बिहार चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस को अब सिर्फ बीजेपी पर आरोप लगाने के बजाय अपने संगठन और रणनीति को नए सिरे से तैयार करना होगा। वरना आने वाले चुनावों में पार्टी की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।















