Maharashtra BMC Election 2026: मुंबई की गलियों में एक ही सवाल गूंज रहा है आखिर देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बीएमसी (BMC) का मेयर कौन बनेगा? चुनाव के नतीजे आए हफ्ता भर बीत चुका है, जनता ने अपना फैसला सुना दिया है, लेकिन मायानगरी को अभी तक उसका ‘नया राजा’ नहीं मिला है। बृहन्मुंबई नगर निगम के इस चुनाव में कांटे की टक्कर के बाद अब असली जंग सत्ता के बंद कमरों में लड़ी जा रही है। (Maharashtra BMC Election 2026) दिलचस्प बात यह है कि जिस महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की, वही अब पदों के बंटवारे को लेकर उलझ गया है। मुंबई की सड़कों पर गड्ढे हों या पानी की समस्या, जनता को उम्मीद थी कि चुनाव के तुरंत बाद काम शुरू होगा, लेकिन फिलहाल तो नेताओं के बीच कुर्सी की खींचतान ही खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
Maharashtra BMC Election 2026: बहुमत की खुशी या कुर्सी का संकट?
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘शिंदे गुट’ वाली शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बीएमसी चुनाव एक साथ मिलकर लड़ा था। नतीजों ने महायुति गठबंधन को बड़ी राहत दी और उन्होंने 114 के जादुई आंकड़े को पार करते हुए कुल 118 सीटों पर कब्जा कर लिया। नियम के हिसाब से मेयर का चुनाव अब तक हो जाना चाहिए था, लेकिन पेंच यहीं फंस गया है। गठबंधन के पास बहुमत तो है, लेकिन ‘मेयर’ किसका होगा, इस पर अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है। (Maharashtra BMC Election 2026) भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सीट बंटवारे और पदों के आवंटन पर बातचीत अभी भी अधूरी है। इसी वजह से जो चुनाव जनवरी के आखिर में होना था, अब उसके फरवरी तक खिंचने के आसार नजर आ रहे हैं।
नामांकन की तारीखें तय, फिर भी क्यों बढ़ी धुकधुकी?
बीएमसी प्रशासन ने पहले ही अपनी तैयारी पूरी कर ली थी। नगर आयुक्त भूषण गगरानी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, मेयर चुनाव के लिए नामांकन पत्र 27 जनवरी तक जमा किए जाने थे और 31 जनवरी की दोपहर को वोटिंग होनी थी। (Maharashtra BMC Election 2026) प्रशासन की मंशा साफ थी कि जनवरी खत्म होने से पहले मुंबई को नया मेयर मिल जाए। लेकिन अब गठबंधन के भीतर मची रार के कारण इस पूरे कार्यक्रम पर पानी फिरता नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जब तक शीर्ष स्तर पर पदों का फॉर्मूला तय नहीं हो जाता, तब तक चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।
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ग्रुप रजिस्ट्रेशन का पेंच और अहम पदों पर दावेदारी
सबसे बड़ी उलझन यह है कि चुनाव जीतने के बाद भी अभी तक किसी भी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अपना ‘नगर निगम समूह’ (Corporation Group) गठित नहीं किया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि भाजपा और शिंदे गुट एक ही गठबंधन समूह के रूप में खुद को रजिस्टर करेंगे या अलग-अलग। (Maharashtra BMC Election 2026) सिर्फ मेयर पद ही नहीं, बल्कि बीएमसी की सबसे पावरफुल ‘स्थायी समिति’ (Standing Committee) के अध्यक्ष पद को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच कशमकश जारी है। दोनों ही दल मुंबई के खजाने और विकास कार्यों की चाबी अपने पास रखना चाहते हैं। यही वजह है कि बातचीत का दौर लंबा खिंचता जा रहा है और मेयर का चुनाव टाला जा सकता है।
मुंबई की जनता अब बेसब्री से उस पल का इंतजार कर रही है जब यह राजनीतिक सस्पेंस खत्म होगा। (Maharashtra BMC Election 2026) क्या भाजपा मेयर पद पर दावा ठोकेगी या फिर शिवसेना के शिंदे गुट को यह मौका मिलेगा? फिलहाल तो ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति बनी हुई है।















