Manmohan Singh: मनमोहन सिंह को भारत रत्न देना चाहते थे प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रपति रहते की थी कोशिश, पर…

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Manmohan Singh: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। यह खबर पूरे देश के लिए शोक का विषय बन गई। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था, लेकिन वे जिंदगी की जंग हार गए।

डॉ. मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) को भारत के आधुनिक आर्थिक सुधारों का जनक माना जाता है। 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के नेतृत्व में उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था में ऐसे सुधार किए जो भारत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान देने में मददगार साबित हुए। उस समय देश आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था, और डॉ. सिंह की नीतियों ने न केवल देश को संकट से बाहर निकाला, बल्कि एक मजबूत आर्थिक ढांचे की नींव रखी।

डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान केवल उनके राजनीतिक करियर तक सीमित नहीं था। वे एक उच्च कोटि के अर्थशास्त्री और प्रशासनिक विशेषज्ञ थे। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और वित्त सचिव जैसे अहम पदों पर रहते हुए उन्होंने देश की नीतियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके योगदानों के लिए उन्हें 1987 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

एक समय ऐसा भी था, जब मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) को भारत रत्न देने की चर्चा जोरों पर थी। हालांकि, इसकी संभावनाएं सिर्फ चर्चाओं तक ही सीमित होकर रह गईं। इस बीच 2023 में प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपनी किताब प्रणब माई फादर, अ डॉटर रिमेंबर में इससे जुड़ा एक बड़ा दावा किया था।

शर्मिष्ठा के मुताबिक, प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति रहते हुए मनमोहन सिंह को भारत रत्न से सम्मानित करना चाहते थे। शर्मिष्ठा ने किताब में लिखा है कि 30 अक्तूबर 2013 को उनके पिता ने इससे जुड़ी बातें अपनी डायरी में लिखीं। उन्होंने तत्कालीन कैबिनेट सचिव को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के प्रधान सचिव पुलक चटर्जी से बात करने के लिए कहा था। प्रणब ने कहा था कि कैबिनेट सचिव को पुलक को संदेश देना चाहिए कि वह इस संबंध में तब यूपीए की अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी से बात करें।

किताब में शर्मिष्ठा ने बताया कि मनमोहन सिंह को भारत रत्न देने की इस मांग के बारे में प्रणब मुखर्जी की किताब में आगे कोई जिक्र नहीं मिलता। ऐसे में यह साफ नहीं है कि पुलक चटर्जी ने यह बात सोनिया गांधी से की भी या नहीं। शर्मिष्ठा का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि डॉ. मनमोहन सिंह को देश का सर्वोच्च सम्मान देने की इस मांग पर आगे क्या हुआ।

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Manmohan Singh: मनमोहन सिंह को आर्थिक सुधारों का श्रेय देते थे प्रणब मुखर्जी

इतना ही नहीं, शर्मिष्ठा का कहना है कि कुछ आपसी मतभेदों के बावजूद प्रणब मुखर्जी हमेशा से मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के प्रशंसक रहे। प्रणब 1991 से 1996 के बीच वित्त मंत्री के तौर पर देश में किए गए आर्थिक सुधारों और 2008 की आर्थिक मंदी के दौरान प्रधानमंत्री के तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने का श्रेय मनमोहन सिंह को ही देते थे।

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