Nepal Bank Rescue Gold and Cash Recovered: हिमालयी देश नेपाल में भोटेकोशी नदी के प्रचंड और विनाशकारी रूप ने चारों तरफ भारी तबाही मचा रखी है। उफनते पानी और कीचड़ के सैलाब ने रिहाइशी बस्तियों से लेकर प्रशासनिक इमारतों तक को अपनी चपेट में ले लिया।
इसी आपदा के बीच नुवाकोट जिले के त्रिशूली इलाके में स्थित कृषि विकास बैंक की शाखा पूरी तरह जलमग्न हो गई थी। पानी का स्तर थोड़ा कम होने के बाद बैंक परिसर के अंदर फंसे करोड़ों रुपये के खजाने को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक बेहद कठिन और जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
Nepal Bank Rescue Gold and Cash Recovered: 8 घंटे तक चला ऑपरेशन
पुलिस और राहत बचाव दल के लिए पानी और मलबे से भरे बैंक लॉकर तक पहुंचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। अधिकारियों ने बताया कि 10 भाद्र को आई भयावह बाढ़ के कारण बैंक की त्रिशूली-ढुंगे शाखा पूरी तरह डूब गई थी।
सुरक्षाबलों और विशेषज्ञ टीमों ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब 8 घंटे तक निरंतर मशक्कत की। इस लंबे अभियान के बाद बैंक से लगभग 50 करोड़ नेपाली रुपये की कीमत का सोना, डेढ़ करोड़ रुपये की नकदी, भारी मात्रा में चांदी और अति संवेदनशील कानूनी दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। इस सफलता के बाद बैंक प्रबंधन ने राहत की सांस ली।
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नेपाल में अब तक 781 लोगों की मौत
भोटेकोशी के इस भयानक कहर के कारण सड़कें टूट गईं और संपर्क पूरी तरह कट गया, जिससे राहत कार्यों में काफी दिक्कतें आईं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने देश को संबोधित करते हुए आपदा के भयावह आंकड़ों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 781 लोगों की अकाल मृत्यु हो चुकी है। प्रतिकूल मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद सरकारी मशीनरी लोगों की जिंदगी बचाने में दिन-रात जुटी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय टीमों का साझा रेस्क्यू मिशन
प्रधानमंत्री शाह के अनुसार, अब तक 9,435 नागरिकों को हवाई जहाजों और सड़क मार्ग के जरिए सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया गया है। इस दौरान 394 हवाई उड़ानें संचालित की गईं, जबकि मैदान में 20 हजार से ज्यादा सुरक्षाबल तैनात हैं। इस कठिन आपदा में भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें नेपाली सेना के साथ मिलकर साझा बचाव अभियान चला रही हैं। रसुवा के पास जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूरों को निकालने के लिए भारतीय विशेषज्ञ जमीन के भीतर तीन किलोमीटर तक गहराई में उतरकर खोजबीन कर रहे हैं।










