Opposition Parties Split: भारतीय राजनीति के गलियारों में इस समय भूचाल आया हुआ है. विपक्ष में खुद को कांग्रेस के बाद नंबर दो की हैसियत का बताने वाली तीन सबसे ताकतवर क्षेत्रीय पार्टियों के भीतर एक के बाद एक हुई ऐतिहासिक बगावत ने पूरे देश को हैरान कर दिया है. टूटने का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद अचानक पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खेमे में जा खड़े हुए. इसके तुरंत बाद पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के आते ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह बिखरती हुई नजर आई.
अब इस सियासी तूफान का अगला शिकार महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना बनी है, जहां साल 2022 की महा-बगावत के बाद बची-खुची पार्टी में एक बार फिर से बहुत बड़ा विद्रोह हो गया है. खबर है कि उद्धव गुट के 9 में से 6 लोकसभा सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ जाने की कतार में खड़े हैं. (Opposition Parties Split) विपक्षी दल इस पूरी टूट के लिए सीधे तौर पर बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि बीजेपी ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे विपक्ष के शीर्ष नेतृत्व की नाकामी और आपसी असंतोष का नतीजा बताया है.
Opposition Parties Split: नेताओं ने क्यों छोड़ा साथ?
इस पूरे सियासी घमासान के बीच बीजेपी के एक बेहद वरिष्ठ सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर कई अंदरूनी और कड़वे सच उजागर किए हैं. (Opposition Parties Split) उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रीय पार्टियों के भीतर इस समय नेतृत्व का भारी अकाल पड़ा हुआ है, यही वजह है कि उनके अपने सांसद और जमीनी नेता एक-एक कर उनका साथ छोड़ रहे हैं. बीजेपी नेता ने विधायकों और सांसदों के दल बदलने के पीछे तीन सबसे बड़े कारण बताए हैं.
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‘निषाद आरक्षण संकल्प…
पहला कारण यह है कि जब किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि को अपनी मौजूदा पार्टी में अपना खुद का राजनीतिक भविष्य पूरी तरह अंधकार में नजर आने लगता है. दूसरा बड़ा कारण यह होता है कि जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और जमीन पर खून-पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं के बीच का आपसी तालमेल और रिश्ता पूरी तरह खत्म हो जाता है. (Opposition Parties Split) वहीं तीसरा कारण अन्य राजनीतिक लाभ या वित्तीय हिस्सेदारी होती है, जिसमें पैसा और ऊंचे पद शामिल होते हैं.
उद्धव की शिवसेना में खत्म हुआ बालासाहब वाला दौर
बीजेपी नेता ने महाराष्ट्र के संकट पर खुलकर बात करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे के गुट में शामिल नेता अपने नेतृत्व के तौर-तरीकों से बेहद नाराज थे. (Opposition Parties Split) उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि एक वो दौर था जब श्रद्धेय बालासाहब ठाकरे खुद यह सुनिश्चित करते थे कि पार्टी के हर छोटे-बड़े नेता और कार्यकर्ता का पूरा ख्याल रखा जाए. लेकिन आज के उद्धव गुट में वैसा कोई पारिवारिक जुड़ाव या स्नेह बाकी नहीं रह गया है.















