Raghav Chadha controversy: राजनीति में जब कोई सितारा चमकता है, तो उसके साथ विवादों की परछाईं भी चलती है। राघव चड्ढा, जिन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) का सबसे ‘सॉफ्ट’ और पढ़ा-लिखा चेहरा माना जाता था, अब बीजेपी का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या राघव चड्ढा का करियर हमेशा बेदाग रहा है? या फिर उनके दामन पर भी भ्रष्टाचार और धोखे के छींटे पड़े हैं? मीडिया की सुर्खियों और राजनीतिक गलियारों में राघव को लेकर कई ऐसी कंट्रोवर्सीज रही हैं, जिन्होंने समय-समय पर न केवल उन्हें बल्कि केजरीवाल सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया। आइए, उन विवादों की गहराई में उतरते हैं जिन्होंने राघव के ‘मिशन 2026’ की जमीन तैयार की।
Raghav Chadha controversy: ‘फर्जी हस्ताक्षर’ विवाद: जब राज्यसभा से होना पड़ा सस्पेंड
राघव चड्ढा के करियर का सबसे बड़ा और चर्चित विवाद अगस्त 2023 में सामने आया। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने दिल्ली सेवा विधेयक (Delhi Services Bill) के लिए एक प्रवर समिति (Select Committee) बनाने का प्रस्ताव रखा और उसमें पांच सांसदों के नाम उनकी अनुमति के बिना शामिल कर दिए। (Raghav Chadha controversy) पांचों सांसदों ने दावा किया कि उन्होंने किसी भी ऐसे प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इसे ‘हस्ताक्षर की जालसाजी’ (Signature Forgery) का नाम दिया गया। इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि राघव चड्ढा को ‘नियमों के घोर उल्लंघन’ और ‘अमर्यादित आचरण’ के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया था। हालांकि बाद में उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया, लेकिन महीनों तक चले इस निलंबन ने उनकी छवि पर गहरा असर डाला।
शराब नीति और ईडी की चार्जशीट: क्या था ‘राज़दार’ का कनेक्शन?
दिल्ली के चर्चित शराब नीति घोटाले (Excise Policy Case) ने जब पूरी ‘आप’ लीडरशिप को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया, तब राघव चड्ढा का नाम भी सुर्खियों में आया। मई 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में राघव चड्ढा के नाम का जिक्र होने की खबरें आईं। हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया था, लेकिन आरोप लगे कि वे उस बैठक का हिस्सा थे जहां इस नीति को लेकर चर्चा हुई थी। (Raghav Chadha controversy) हाल ही में, अप्रैल 2026 में पूर्व ‘आप’ नेता नवीन जयहिंद ने सनसनीखेज दावा किया कि असली विवाद भ्रष्टाचार के ‘माल’ को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली और पंजाब से उगाही गई रकम को सिंगापुर भेजने के बजाय राघव लंदन ले गए, जिसके बाद पार्टी के भीतर उनके साथ ‘मारपीट’ तक हुई। राघव ने इन दावों को ‘स्क्रिप्टेड कैंपेन’ बताकर खारिज किया है।
लंदन की वो ‘मिस्टीरियस’ सर्जरी और लंबी गैर-मौजूदगी
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे और पार्टी संकट से जूझ रही थी, तब राघव चड्ढा हफ्तों तक लंदन में थे। आधिकारिक तौर पर बताया गया कि वे आंखों की एक जटिल सर्जरी (Vitrectomy) के लिए वहां गए थे और देरी होने पर उनकी आंखों की रोशनी जा सकती थी। लेकिन विपक्ष और खुद उनकी पार्टी के भीतर भी दबी जुबान में चर्चा थी कि वे जांच एजेंसियों के डर से देश छोड़ गए हैं। 2025 के दिल्ली चुनाव में भी उनकी सक्रियता बहुत कम रही, जिससे इन अटकलों को बल मिला कि वे पार्टी से ‘कॉम्प्रोमाइज’ कर चुके हैं या दूरी बना रहे हैं।
विवाद केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहे। अप्रैल 2024 में ‘आप’ विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारी, जो ड्रग व्यापार को संरक्षण दे रहे थे, वे राघव चड्ढा के खास थे। बीजेपी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और राघव पर ‘ड्रग माफिया’ को संरक्षण देने के आरोप लगाए। इसके अलावा, जब उन्हें ‘आप’ के उप-नेता पद से हटाया गया, तो उन पर आरोप लगा कि वे संसद में गंभीर मुद्दे उठाने के बजाय केवल ‘समोसे की कीमत’ जैसे तुच्छ मुद्दे उठाते हैं और अपनी ‘सॉफ्ट पीआर’ में व्यस्त रहते हैं।
क्या बीजेपी में जाने से धुल जाएंगे पुराने दाग?
राघव चड्ढा के खिलाफ लगे ये आरोप कितने सच हैं और कितने राजनीतिक प्रतिशोध, यह तो जांच का विषय है। लेकिन “मैं सही आदमी था, गलत पार्टी में था” कहकर राघव ने संकेत दिया है कि वे उन तमाम विवादों को अपनी पुरानी पार्टी के ‘पाप’ बताकर पीछे छोड़ना चाहते हैं। बीजेपी के ‘वॉशिंग मशीन’ वाले तंज के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये विवाद राघव के नए राजनीतिक सफर की बाधा बनेंगे या फिर वे एक नई और बेदाग छवि के साथ पंजाब की सत्ता पर दावा ठोकेंगे।















