Dattatreya Hosabale on Modi-RSS Relation: भारतीय राजनीति और वैचारिक गलियारों में अक्सर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आपसी तालमेल को लेकर कयास लगते रहते हैं। लेकिन अब संघ में ‘नंबर दो’ की हैसियत रखने वाले सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने इन सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। एक अहम इंटरव्यू में होसबाले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें आरएसएस का ‘सबसे अच्छा प्रतिनिधि’ करार दिया है। (Dattatreya Hosabale on Modi-RSS Relation) यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार सरकार और संघ के बीच दूरियों का दावा करता रहा है। होसबाले के इस रुख ने साफ कर दिया है कि सत्ता और संगठन के बीच न केवल बेहतर समन्वय है, बल्कि दोनों एक ही लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
Dattatreya Hosabale on Modi-RSS Relation: होसबाले का मोदी विजन
दत्तात्रेय होसबाले ने प्रधानमंत्री मोदी के काम करने के तरीके को ‘यूनिक’ बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी भले ही अपने ढंग से काम करते हों, लेकिन उनका मूल संदेश हमेशा संघ की विचारधारा से प्रेरित होता है। (Dattatreya Hosabale on Modi-RSS Relation) उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि संघ ने जब एक पेड़ लगाने की अपील की, तो प्रधानमंत्री ने उसे ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे भावुक और प्रभावी अभियान में बदल दिया। होसबाले के अनुसार, मोदी की भाषा या शब्द अलग हो सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य वही है जो संघ का है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की कई विकास योजनाओं और सांस्कृतिक अभियानों में आरएसएस की विचारधारा साफ झलकती है, जो यह साबित करता है कि मोदी एक सच्चे स्वयंसेवक के रूप में काम कर रहे हैं।
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पंच परिवर्तन और पंच प्रण: वैचारिक मेल का नया युग
आरएसएस ने अगले 25 वर्षों के लिए ‘पंच परिवर्तन’ का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें सामाजिक सौहार्द, पर्यावरण संरक्षण, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, नागरिक कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों को बचाना शामिल है। (Dattatreya Hosabale on Modi-RSS Relation) होसबाले ने बताया कि पीएम मोदी ने भी लाल किले की प्राचीर से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत जिन ‘पंच प्रण’ की बात की, वे संघ के इसी विजन का विस्तार हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी नैसर्गिक रूप से वैचारिक काम करते हैं। जब संघ के शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट और सिक्का जारी किया गया, तब भी प्रधानमंत्री ने भविष्य के भारत की बात करते हुए कहा था कि संघ द्वारा दिखाया गया रास्ता ही भारत का असली मार्ग है। यह वैचारिक स्पष्टता दोनों संगठनों के बीच की अटूट कड़ी को दर्शाती है।
भाजपा और संघ का रिश्ता: 1980 की वो नींव और आज की हकीकत
इंटरव्यू के दौरान होसबाले ने भाजपा के गठन के इतिहास को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 1980 में जब भाजपा बनी थी, तब इसके संस्थापक नेता— अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी स्पष्ट थे कि वे आरएसएस से अपना नाता नहीं तोड़ेंगे। (Dattatreya Hosabale on Modi-RSS Relation) वे जनता पार्टी से इसीलिए अलग हुए ताकि संघ के साथ अपना संबंध बनाए रख सकें। होसबाले ने स्पष्ट किया कि आरएसएस और भाजपा के रिश्तों को कभी भी डिस्टर्ब या अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि इनकी जड़ें एक ही हैं। प्रधानमंत्री मोदी देश के चुने हुए नेता जरूर हैं, लेकिन वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को कभी नहीं भूले हैं। वे संगठन के विचारों को गहराई से जानते और समझते हैं, इसीलिए वे संघ के सबसे बेहतरीन प्रतिनिधि हैं।
भविष्य के भारत के लिए एक ही मार्ग
दत्तात्रेय होसबाले के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नया संदेश भेजा है। (Dattatreya Hosabale on Modi-RSS Relation) यह न केवल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को संघ की पूर्ण स्वीकृति देता है, बल्कि आने वाले समय में सरकार और संगठन के बीच और भी मजबूत तालमेल का संकेत है। संघ का मानना है कि भारत को औपनिवेशिक सोच से बाहर निकालने और एक सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए जिस अनुशासन और वैचारिक शुद्धता की जरूरत है, उसे पीएम मोदी बखूबी जमीन पर उतार रहे हैं। कुल मिलाकर, होसबाले ने यह साफ कर दिया है कि संघ और सरकार के बीच कोई मतभेद नहीं है और दोनों का गंतव्य एक ही है परम वैभवशाली भारत।















