Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी जॉइन करने के तुरंत बाद संगठनात्मक संस्कृति का पहला सबक सीखने को मिला। यह घटना उस समय की है जब उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान संबोधन के तरीके को लेकर उन्हें पार्टी प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब राघव चड्ढा राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिले, तो उन्होंने बातचीत के दौरान तीन-चार बार उन्हें “नितिन नबीन जी” कहकर संबोधित किया। वहां मौजूद बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इस बात पर ध्यान दिया और तुरंत हस्तक्षेप किया। बताया जाता है कि तरुण चुघ ने उन्हें विनम्रता से समझाया कि बीजेपी की परंपरा के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके नाम से नहीं, बल्कि “राष्ट्रीय अध्यक्ष जी” कहकर संबोधित किया जाता है। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के प्रोटोकॉल को लेकर पार्टी के भीतर निर्देश दिए गए हों।
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जब नितिन नबीन को राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली थी, तभी पार्टी ने साफ कर दिया था कि संगठन में पद की गरिमा सर्वोपरि है। चूंकि वह उम्र और अनुभव के लिहाज से कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे हैं, इसलिए शुरुआत में कुछ नेता अनौपचारिक बातचीत में उन्हें नाम से पुकार देते थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने सभी नेताओं और पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि संवाद के दौरान पद के अनुसार ही संबोधन किया जाए। बीजेपी का मानना है कि यह एक कैडर आधारित पार्टी है, जहां व्यक्ति से बड़ा पद और पद से बड़ा संगठन होता है। यही कारण है कि यहां अनुशासन और परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।
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वरिष्ठ नेताओं, खासकर राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके नाम से संबोधित करने के बजाय उनके पदनाम से बुलाना एक स्थापित परंपरा है, जिसका पालन सभी को करना होता है। यह परंपरा बीजेपी के शुरुआती दौर, यानी जनसंघ काल से चली आ रही है। पार्टी के अनुसार, इससे संगठन में अनुशासन बना रहता है और पद की गरिमा भी कायम रहती है। राघव चड्ढा के लिए यह अनुभव बीजेपी की कार्यशैली और संगठनात्मक संस्कृति को समझने की दिशा में एक शुरुआती सीख माना जा रहा है।















