Ranveer Singh Don 3 Controversy: रणवीर सिंह की फिल्म डॉन 3 अक्सर किसी ना किसी ना किसी वजह से चर्चाओं में बनी रहती है। कुछ समय पहले ही रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच का विवाद FWICE तक पहुँच गया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके FWICE ने बताया कि उन्होंने रणवीर सिंह को डॉन 3 विवाद के लिए तीन बार नोटिस दिया। लेकिन उनके द्वारा या उनकी टीम के द्वारा किसी प्रकार का रिएक्शन नहीं दिया। जिसकी वजह से FWICE द्वारा उनके खिलाफ असहयोग प्रस्ताव पारित किया जा रहा है। जिसके बाद रणवीर सिंह लगातार चर्चाओं में छाए रहे। और अब जाकर डॉन 3 को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला
Ranveer Singh Don 3 Controversy: डॉन 3 कंट्रोवर्सी पहुँची कानूनी विवाद में
रणवीर सिंह ने जबसे डॉन 3 से किनारा किया है। उस दीन से फिल्म को लेकर विवाद रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है। हर रोज एक नया विवाद शुरू हो जा रहा है। कुछ दिन पहले ही FWICE द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ असहयोग प्रस्ताव पारित किया गया। जिसके बाद एक नई रिपोर्ट सामने आई, जिसमें बताया कि रणवीर सिंह ने फरहान अख्तर और डॉन 3 की टीम से सुलह करने के लिए 45 करोड़ का प्रस्ताव पर बात की थी। जिसपर रणवीर सिंह ने 10 करोड़ रूपए का प्रस्ताव टीम को दिया था। इसके साथ ही रणवीर सिंह यदि भविष्य एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ काम करते हैं। तो वो उनको फीस में 25 प्रतिशत का डिस्काउंट देंगे। लेकिन फरहान अख्तर ने उनके इस प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया।
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इन सबके बीच अब जाकर Ranveer Singh और Don 3 के विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। ये मामला कोर्ट में पहुँच गया है। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स के पूर्व अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने कथित तौर पर दिंडोशी स्थित बॉम्बे सिविल कोर्ट में याचिका दायर की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीए) के पूर्व अध्यक्ष अग्रवाल ने कथित तौर पर दिंडोशी स्थित बॉम्बे सिविल कोर्ट में याचिका दायर की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एफडब्ल्यूआईसीई और आईएमपीए के खिलाफ अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया है कि किसी भी व्यक्ति, संगठन या व्यापारिक संस्था के पास किसी पर प्रतिबंध लगाने या दूसरों को किसी के साथ काम करने से इनकार करने का निर्देश देने का कानूनी अधिकार नहीं है। दोनों संगठनों को अदालत द्वारा नोटिस जारी किया गया है।
टीपी अग्रवाल, जिन्होंने 17 वर्षों तक आईएमपीपीए के अध्यक्ष के रूप में और चार बार फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफएफआई) के प्रमुख के रूप में कार्य किया, ने इस बात पर जोर दिया कि किसी के साथ काम करने से रोकने के प्रयासों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “ऐसे कार्यों के आजीविका और रचनात्मक स्वतंत्रता पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं,” और इसलिए ऐसे मामलों को कानूनी रूप से निपटाया जाना चाहिए।















