रिपोर्ट -सुनील ठाकुर
Sonbhadra: रेणुकूट सोनभद्र 08 अप्रैल 2026। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी,सोनभद्र एवं प्रयास फाउंडेशन के सहयोग से स्वर्गीय श्रीमती सरिता सिंह की तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पति धीरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा वृद्धाश्रम (दुद्धी) में खाद्य सामग्री,मिठाई, एवं स्वच्छता किट वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम प्रातः 10:00 बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें वृद्धाश्रम में निवास कर रही वृद्ध महिलाओं एवं पुरुषों को आवश्यक खाद्य सामग्री एवं स्वच्छता किट जिसमे ( स्नान साबुन,कपड़ा धोने का साबुन,सर्फ, टूथ ब्रश,पेस्ट,शेम्पू,व बिस्कुट,गुड़) वितरित की गई। (Sonbhadra) इस दौरान सेवा कार्य के साथ-साथ मानवता और संवेदना की सच्ची तस्वीर भी देखने को मिली।
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वृद्धाश्रम में मौजूद कई माताओं ने अपने जीवन के संघर्षों की कहानियाँ साझा कीं। (Sonbhadra) किसी ने अपने पति के बिछड़ने का दर्द सुनाया, तो किसी ने बेटे-बहुओं के व्यवहार की पीड़ा तो किसी ने पोते-पोती से बिछुड़ने का दर्द व्यक्त की। उनकी आंखों में छलकते आँसू और टूटे हुए शब्द सुनकर उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। यह पल सभी के लिए बेहद भावुक और आत्ममंथन करने वाला रहा।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि समाज के इन उपेक्षित बुजुर्गों के लिए समय-समय पर सेवा और सहयोग के ऐसे प्रयास जारी रखे जाएंगे, ताकि उन्हें सम्मान और अपनापन मिल सके।
इस अवसर पर आयोजक दिलीप कुमार दुबे (संस्थापक, प्रयास फाउंडेशन एवं जिला प्रबंधन समिति सदस्य, आईआरसीएस सोनभद्र) ने कहा कि “वृद्धजनों की सेवा ही सच्ची मानव सेवा है। (Sonbhadra) हमें अपने परिवार और समाज में बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल के प्रति जागरूक होना चाहिए।”
कार्यक्रम ने सभी उपस्थित लोगों के हृदय को छू लिया और यह संदेश दिया कि छोटी-छोटी सेवाएं भी किसी के जीवन में बड़ी खुशी ला सकती हैं। आप भी सेवा कार्य के लिए 📞 संपर्क: 6390395390 कर सकते है।
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इस अवसर पर वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह और उनकी टीम को हृदय से आशीर्वाद दिया। समाज के प्रति इस प्रकार की संवेदनशीलता हमें याद दिलाती है कि अपनों की यादों को दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाकर भी जीवित रखा जा सकता है। (Sonbhadra) तथा दिवाकर द्विवेदी,पत्रकार संजय श्रीवास्तव,वृद्धाश्रम संचालिका सविता सिंह का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किये दिलीप दुबे ने कहा कि बुजुर्गों का आशीर्वाद ही समाज की असली पूंजी है और उनकी सेवा से मिलने वाला संतोष अद्वितीय है।













