Swami Prasad Maurya : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने एकबार फिर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने जनता से आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को केंद्र की सत्ता से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है। सपा के विधान परिषद सदस्य मौर्य रविवार को अमेठी जिले के हसनपुर तिवारी गांव में संविधान जागरूकता संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
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इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य में सरकार चला रही भाजपा पर जमकर निशाना साधा। पूर्व कैबिनेट मंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी भगवान राम के नाम पर समाज और लोकतंत्र को बांटने का काम कर रही है। उनके द्वारा समाज को जातियों में बांटकर जहर घोलने का काम किया जा रहा है, इसलिए ऐसी सरकार से सावधान रहने की जरूरत है।

Swami Prasad Maurya : धर्म के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च किए जा रहे
स्वामी प्रसाद ने अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के भव्य आयोजन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के पास मानदेय बढ़ाने के लिए धन नहीं है लेकिन धर्म के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च करके प्रदेश को महंगाई की ओर धकेला जा रहा है। ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियो का विपक्षी नेताओं के खिलाफ दुरूपयोग कर लोकतंत्र पर कुठाराघात किया जा रहा है।

Swami Prasad Maurya : आरक्षण खत्म करना चाहती है डबल इंजन सरकार
सपा नेता ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाज के दलितो, पिछड़ों और शोषतों के लिए संवैधानिक आरक्षण की व्यवस्था बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने की है, जिसे आज ये डबल इंजन की सरकार समाप्त करने की जुगत में है। अपने अधिकार की लड़ाई के लिए हमें अपने आप को पहचानना होगा।

बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने इससे पहले देश के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों और कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न देने के ऐलान पर भी बीजेपी पर हमला बोला था। उन्होंने कहा, किसानों के मसीहा व पूर्व प्रधानमंत्री, चौधरी चरण सिंह, कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन व पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने हेतु सर्वथा उचित निर्णय है। भले ही 2024 की चुनावी मजबूरी में दिया गया हो, मैं इसका स्वागत करता हूं। यदि योग्यता, गरिमा व व्यक्तित्व के आधार पर ही सम्मान देना था, तो इसके पहले भी भाजपा की चार बार की सरकार में क्यों नहीं दिया गया? चुनावी चला-चली की बेला में क्यों?









