UP Cabinet Decision 2026: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आज 6 जुलाई 2026 यानी कि सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम और बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी गयी है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में कुल 29 प्रस्तावों में से 27 को मंजूरी मिल गई। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा जिसकी हो रही है, वो है शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का, जिसका नाम बदलकर अब ‘परशुराम पुरी’ कर दिया गया है। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में नवाचार और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी मंजूरी दे दी गई है।
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UP Cabinet Decision 2026: जलालाबाद अब कहलाएगा ‘परशुराम पुरी’
योगी कैबिनेट ने शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र का नाम बदलकर परशुराम पुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। सरकार का कहना है कि यह क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से खास महत्व रखता है और इसे भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है।
इस निर्णय के बाद अब आधिकारिक दस्तावेजों और
रिकॉर्ड में जलालाबाद के बजाय ‘परशुराम पुरी’ नाम दर्ज किया जाएगा। इसे लेकर सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलेगी।
साल 2018 में शुरू हुई थी नाम बदलने की प्रक्रिया
जलालाबाद का नाम बदलने की मांग कोई नई नहीं है। इस प्रक्रिया की शुरुआत मार्च 2018 में हुई थी, जब शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद ने पहली बार बोर्ड बैठक में नाम बदलाव का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद सितंबर 2023 में भी नगर पालिका ने फिर से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।
तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपनी संस्तुति के साथ यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा था। राज्य सरकार ने आगे इसे केंद्र सरकार के पास भेजा, जहां 20 अगस्त 2025 को नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी। अब योगी कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस प्रक्रिया को अंतिम रूप मिल गया है।
भगवान परशुराम जी का जन्मस्थली माना जाता है स्थान
पौराणिक मान्यताओं के ममुतबिक, शाहजहांपुर का यह क्षेत्र भगवान परशुराम की जन्मभूमि माना जाता है। यहां स्थित प्राचीन परशुराम मंदिर हजारों सालों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2022 में इस स्थान को आधिकारिक रूप से भगवान परशुराम की जन्मभूमि घोषित किया था। इसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को बेहद गंभीरता से लेते हुए कस्बे का नाम बदलने का फैसला लिया गया है।
जलालाबाद नाम को लेकर भी रही हैं अलग-अलग मान्यताएं
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के बीच जलालाबाद नाम की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मत हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर के सम्मान में इस कस्बे का नाम जलालाबाद रखा गया था। हालांकि, इस विषय पर अलग-अलग ऐतिहासिक व्याख्याएं भी सामने आती रही हैं।
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी स्वीकृति दी गई। आने वाले 5 सालों तक प्रभावी रहने वाली इस नीति का उद्देश्य प्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप राज्यों में शामिल करना है।
नई नीति के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप-टेक, फिनटेक, हेल्थटेक और अन्य उभरते क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, संस्थागत सहयोग और निवेश के मौके उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार तलाशने के बजाय नौकरी देने वाला उद्यमी बनाना है।
रोजगार और निवेश में होगी वृद्धि
इसे लेकर सरकार का मानना है कि स्टार्टअप नीति-2026 लागू होने से प्रदेश में नए निवेश आकर्षित होंगे, युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ेंगे और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। वहीं जलालाबाद का नाम बदलकर परशुराम पुरी किए जाने के निर्णयों को सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।











