UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद में बिना मान्यता के 221 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर नोटिस जारी किया है, साथ ही सभी विद्यालयों पर एक-एक लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा सभी स्कूल संचालकों को केवल सात दिन का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय में जुर्माना की राशि जमा नहीं की गई तो उसके बाद कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
UP News: इन विद्यालयों को जारी हुआ नोटिस
जानकारी के मुताबिक जनपद के नगर क्षेत्र के नौ, उरुवा के तीन, शंकरगढ़ के दो, कौधियारा के दो, बहादुरपुर के 23, मेजा के दो, जसरा के तीन, चाका के आठ, कौड़िहार के 15, मऊआइमा के 16, करछना के पांच, होलागढ़ के 11, हंडिया के छह, सोरांव के छह, सैदाबाद के 15, बहरिया के 20 अमान्य स्कूलों को नोटिस देकर जुर्माना भी लगाया गया है। इसीक्रम में धनूपुर में 19, कौड़िहार प्रथम में 16, मांडा में 14, प्रतापपुर में छह, फूलपुर में 14 और कोरांव में छह स्कूलों पर कार्रवाई की गई है।

UP News : स्कूलों को सात दिन का दिया गया समय
बता दें कि बीते दिनों बेसिक शिक्षा विभाग ने बिना मान्यता के चलने वाले स्कूलों के खिलाफ अभियान चलाया था। उन्हें नोटिस देकर स्कूल बंद कराने के साथ अवसर दिया था कि यदि वे नियम-शर्तों को पूरा करते हैं तो मान्यता लेने की प्रक्रिया पूरी कर लें। जब तक मान्यता नहीं मिलती है तब तक स्कूल बंद रखने की हिदायत दी गई थी। इसके बाद भी तमाम विद्यालयों ने ध्यान नहीं दिया। अब सभी बिना मान्यता वाले स्कूलों पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। विद्यालय बंद करने की हिदायत दी गई है।

UP News : 75 विद्यालयों के स्टाफ का वेतन रोका गया
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण के स्तर को सुधारने का लगातार प्रयास किया जा रहा है, इसके बावजूद 75 विद्यालयों में 50 प्रतिशत भी छात्रों की उपस्थित नहीं है। इन सभी स्कूलों में उपस्थित बढ़ाने का निर्देश देने के साथ ही कार्रवाई कर जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। संबंधित सभी स्कूलों के सभी स्टाफ का दिसंबर को वेतन भी रोक दिया गया है।

बच्चों के भविष्य पर संकट
प्रयागराज में बिना मान्यता के संचालित हो रहे 221 विद्यालयों में करीब 25,000 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इन स्कूलों के बंद होने से इन बच्चों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है। इन बच्चों को अब नए विद्यालयों में दाखिला लेना होगा। लेकिन, नए विद्यालयों में जगह मिलना भी आसान नहीं होगा। ऐसे में इन बच्चों को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए कई शर्तों को पूरा करना होता है। इन शर्तों में विद्यालय की भौतिक संरचना, शिक्षकों की योग्यता, पाठ्यक्रम, शिक्षण सामग्री आदि शामिल हैं। मान्यता प्राप्त विद्यालयों को सरकार से आर्थिक सहायता भी मिलती है।

क्या है सरकार की मंशा?
सरकार का मानना है कि बिना मान्यता के संचालित होने वाले विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दी जा रही है। इन विद्यालयों में शिक्षकों की योग्यता भी कम होती है। ऐसे में इन विद्यालयों को बंद करने से बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी। बेशक बिना मान्यता के संचालित होने वाले विद्यालयों को बंद करना जरूरी है। लेकिन, इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य का भी ध्यान रखना होगा। सरकार को इन बच्चों को नए विद्यालयों में दाखिला लेने में मदद करनी चाहिए। इसके अलावा, सरकार को बिना मान्यता के संचालित होने वाले विद्यालयों को मान्यता देने की प्रक्रिया को भी सरल बनाना चाहिए।
















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