बेलरायां खीरी–मिल सुचारू रूप से चले भ्रष्टाचार करने वालों की जांच हो जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी जेल जाएं मिल घाटे से उबरते हुए अपने खोए हुए गौरव को वापस हासिल करे। मिल बचाओ अभियान को इलाके के किसानों व बुद्धजीवी लोगों की मांग पर अपने समाचार पत्रों में छापने पर मिल अधिकारियों की सह पर इलाके के पत्रकारों को गलत मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने तक कि कुछ अधिकारियों के सुभचिंतक धमकी देने लगे हैं जिससे आहत पत्रकारों में भी आक्रोश ब्याप्त है। किसानों ने मिल में ब्याप्त भृष्टाचार की जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराने की मांग की है।
तराई इलाके की सरजू सहकारी चीनी मिल जो क्षेत्र की लाइफ लाइन के नाम से जानी जाती है जिस मिल के ऊपर आज मिल सूत्रों के मुताबिक हजारों करोड़ का घाटा है मिल घाटे से उबर पाएगी या कर्ज में डूबते हुए बन्द हो जाएगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इलाके के किसानों व बुद्धजीवियों ने मिल को बचाने के लिए मिल बचाओ अभियान के तहत शासन-प्रशासन से मिल में ब्याप्त भृष्टाचार के कारण घाटे पर घाटे से जूझ रही को बचाने की गुहार लगाई है।किसान डॉ संजय वर्मा,कपिल वर्मा,कंचन वर्मा,बिरजेंद्र वर्मा,लक्ष्मी नारायण वर्मा(जिला पंचायत सदस्य) राकेश वर्मा,सुनीता वर्मा,अवधबिहारी लाल सहित तमाम किसानों की मुख्य गन्ना आयुक्त उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि मिल में मेंटिनेंस व सप्लाई के कार्यों तथा स्क्रेप की बिक्री की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है जिसे पत्रकारों ने अपने-2 समाचार पत्रों में प्राथमिकता से छापने पर मिल अधिकारियों के सुभचिन्तकों ने पत्रकारों को धमकाने का भी काम शुरू कर दिया
जिससे पत्रकारों में भी रोष ब्याप्त है।आपको बताते चलें कि सहकारी चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए शासन ने पीसीएस जीएम की नियुक्ति की थी जिस कारण लोगों को चीनी मिल के वजूद पर गहराते संकट के बादल छटने के आसार नजर आने लगे थे लेकिन बेलरायां चीनी मिल में पीसीएस जीएम शुशील कुमार गोंड चाहकर भी भृष्टाचार के तिलस्म को तोड़कर मिल को घाटे से नही उभार पा रहे हैं।
रिपोर्ट – अजय वर्मा













