Shahbaz Sharif: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। यह बयान उन्होंने इस्लामाबाद में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम ‘यौम-ए-तशक्कुर’ के दौरान दिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।
शहबाज़ शरीफ ने बताया कि यह जानकारी उन्हें 9 और 10 मई की दरम्यानी रात लगभग 2:30 बजे मिली, जब पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने स्वयं उन्हें फोन कर इस हमले की सूचना दी। शरीफ ने कहा भारतीय बैलिस्टिक मिसाइलों ने हमारे प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। हमारी वायुसेना ने त्वरित प्रतिक्रिया में स्वदेशी तकनीक और चीनी फाइटर जेट्स पर उन्नत उपकरणों का उपयोग करते हुए देश की सुरक्षा सुनिश्चित की। (Shahbaz Sharif) अब तक पाकिस्तान की सेना ने तो इन हमलों की पुष्टि की थी, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक स्वीकारोक्ति नहीं आई थी। शहबाज़ शरीफ का यह बयान पहली बार है जब किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत के सैन्य अभियान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है।

इससे पहले, 10 मई को पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक आपातकालीन प्रेस वार्ता कर बताया था कि भारत ने नूर खान एयरबेस (रावलपिंडी), मुरिद (चकवाल) और रफीकी (झंग) एयरबेस को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया था।
Shahbaz Sharif: उपग्रह चित्रों से भी हमलों की पुष्टि
अमेरिकी कंपनी मैक्सर टेक्नोलॉजी द्वारा जारी सैटेलाइट इमेजरी से भी यह पुष्टि हुई है कि पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर बमबारी के निशान स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। (Shahbaz Sharif) 25 अप्रैल और 10 मई के बीच ली गई तस्वीरों की तुलना से नूर खान, मुशाफ (सरगोधा), भोलारी और शाहबाज (जैकबाबाद) एयरबेस पर क्षति का स्पष्ट पता चलता है, जो एक संगठित और सटीक सैन्य कार्रवाई की ओर इशारा करता है।
भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
शहबाज़ शरीफ के इस खुलासे के बाद भारत की राजनीति में भी हलचल देखने को मिली है। (Shahbaz Sharif) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी विभाग प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शहबाज़ शरीफ का बयान इस बात का प्रमाण है कि ऑपरेशन सिंदूर न केवल साहसी था, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद सटीक रहा।
भारत सरकार की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारत की सुरक्षा नीति और क्षेत्रीय रणनीति को लेकर एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।














