Tej Pratap Yadav: मकर संक्रांति के अवसर पर लालू प्रसाद यादव के पुत्र और जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव की ओर से आयोजित दही-चूड़ा भोज इस बार बिहार की राजनीति में खास चर्चा का विषय बन गया। इस आयोजन में न मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए और न ही भारतीय जनता पार्टी के किसी बड़े नेता की मौजूदगी नजर आई। (Tej Pratap Yadav) इतना ही नहीं, नेता प्रतिपक्ष और तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी यादव भी इस भोज से दूरी बनाए रहे। प्रमुख राजनीतिक चेहरों की गैरहाजिरी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे।
इसी बीच जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार ने तेज प्रताप यादव को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दे दिया। (Tej Pratap Yadav) उन्होंने सार्वजनिक मंच से तेज प्रताप यादव को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का खुला निमंत्रण दे दिया। सांसद का यह बयान सामने आते ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई।
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राजगीर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सांसद कौशलेंद्र कुमार के साथ जेडीयू विधायक कौशल किशोर और विधान परिषद सदस्य रीना यादव ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। तीनों नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि तेज प्रताप यादव एनडीए में आने का फैसला करते हैं, तो गठबंधन के दरवाजे उनके लिए पूरी तरह खुले हैं। (Tej Pratap Yadav) जेडीयू नेताओं का दावा है कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की हालिया चुनावी असफलताओं के बाद तेज प्रताप यादव को पार्टी में वह महत्व नहीं मिल पा रहा है, जिसके वे हकदार हैं। उनका कहना है कि तेज प्रताप को धीरे-धीरे हाशिये पर धकेला जा रहा है।
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एनडीए नेताओं ने आरजेडी के भीतर आंतरिक खींचतान की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के दौरान राबड़ी देवी के आवास पर वर्षों बाद राजनीतिक चहल-पहल का अभाव नजर आया, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। (Tej Pratap Yadav) तेज प्रताप यादव के भोज से सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के बड़े नेताओं की दूरी को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
जेडीयू नेताओं ने लालू प्रसाद यादव और तेज प्रताप यादव के बीच अंतर को भी रेखांकित किया। उनका कहना है कि जहां लालू यादव पर कई घोटालों के आरोप हैं, वहीं तेज प्रताप यादव पर अब तक किसी तरह का भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। इसी वजह से एनडीए उन्हें एक साफ-सुथरी छवि वाले और राजनीतिक रूप से स्वीकार्य विकल्प के तौर पर देख रहा है।















