उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों में जुटे एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी इन दिनों यूपी के दौरे पर हैं। पहले दिन रामनगरी अयोध्या, दूसरे दिन सुल्तानपुर और आज यानि तीसरे दिन ओवैसी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले पहुंचे हैं। बाराबंकी में ओवैसी ने वंचित-शोषित समाज सम्मेलन को संबोधित किया। ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों के साथ धर्मनिरपेक्षता को जानबूझकर कमजोर किया गया है, दलितों को निशाना बनाया जा रहा है। मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार भाजपा के इशारे पर किए गए हैं, जबकि अन्य दलों सपा, बसपा या कांग्रेस ने दर्शकों की भूमिका निभाई, उन्होंने सीएए, ट्रिपल तालक के खिलाफ नहीं बोला।
इससे पहले सुल्तानपुर में ओवैसी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती की नासमझी की वजह से नरेंद्र मोदी दो बार देश के प्रधानमंत्री बने। ओवैसी ने अपने ऊपर लग रहे उन आरोपों को भी खारिज किया, जिसमें उन्हें राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में वोट काटने वाले के रूप में पेश किया गया।
मुसलमान आज तक जिन पार्टियों को वोट देते रहे, उनमें से किसी ने मुसलमानों को नेता नहीं बनाया। ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों ने बरसों एसपी-बीएसपी और कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन अपने समाज अपने समाज के साथ खड़े नहीं हुए। अगर ऐसा करते तो यूपी में मुसलमान आज राजनीतिक ताकत बन गए होते। ओवैसी ने कहा, ‘कहा जाता है ओवैसी लड़ेगा तो वोट काट देगा। सुल्तानपुर में आप सबने अखिलेश यादव को झोली भर कर वोट दिया तो सूर्या (सूर्यभान सिंह) कैसे जीते? 2019 में लोकसभा के चुनाव में सुल्तानपुर से भाजपा कैसे जीती, तब ओवैसी तो चुनाव नहीं लड़ रहा था। क्या अखिलेश यादव ने कहा कि हिंदू ने वोट नहीं किया इसलिए हारे? क्यों मुसलमानों को कहते हैं, मुसलमानों ने वोट नहीं दिया, क्या मुसलमान कैदी हैं? ओवैसी ने ये भी कहा कि दो बार भाजपा मुसलमानों के वोटो से नहीं जीती है।’
ओवैसी ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए सवाल किया, ‘क्या मुसलमान आपके गुलाम हैं?’ उन्होंने कहा, ‘नरेंद्र मोदी अखिलेश और मायावती की ‘नासमझी’ के कारण दो बार प्रधानमंत्री बने।’ ओवैसी ने कहा कि लोकसभा के चुनाव में मजलिस (एआईएमआईएम) तीन सीटों हैदराबाद, औरंगाबाद और किशनगंज से चुनाव लड़ी। उन्होंने कहा, ”हमने हैदराबाद में भाजपा को हराया, हमें हराने मोदी और अमित शाह आए थे, लेकिन उनकी दाल नहीं गली। औरंगाबाद में 21 साल से शिवसेना सांसद को मजलिस ने हराया। किशनगंज में हम हार जरूर गए, लेकिन लाखों वोट मिले।’













