Akhilesh Yadav Kunda Seat: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ सीटें ऐसी हैं, जिनका नाम आते ही हलचल तेज हो जाती है। प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट भी उन्हीं में से एक है। यहां की राजनीति किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती, जहां हर चुनाव के साथ नए किरदार, नई रणनीति और नए समीकरण सामने आते हैं। कुंडा की पहचान बन चुके राजा भैया पिछले तीन दशकों से यहां जीत का परचम लहराते आ रहे हैं, लेकिन अब सियासी गलियारों में कुछ अलग ही चर्चा चल पड़ी है।
Akhilesh Yadav Kunda Seat: राजा भैया का अभेद किला और विपक्ष की चुनौती
जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के मुखिया रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के लिए कुंडा सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि सियासी किला है। भाजपा हो, सपा या बसपा, अब तक कोई भी बड़ी पार्टी इस किले को फतह नहीं कर पाई। (Akhilesh Yadav Kunda Seat) हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे होते हैं, लेकिन नतीजा वही रहता है। यही वजह है कि कुंडा की सीट हमेशा मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए दिलचस्प बनी रहती है।
अखिलेश यादव के बयान ने बढ़ाई हलचल
हाल ही में लखनऊ में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से पूछा गया कि क्या कुंडा से ज्योत्सना सिंह को टिकट दिया जाएगा, तो उन्होंने मुस्कराते हुए तीखा जवाब दे दिया। (Akhilesh Yadav Kunda Seat) बोले, “तुम उनके समर्थक हो क्या? टिकट देने की बात हम बाद में करेंगे, अभी बहुत समय है… टिकट आप लोग मत बांटो।” इस जवाब ने सवालों से ज्यादा चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि सपा इस बार कुंडा को लेकर गंभीर रणनीति बना रही है।
कौन हैं ज्योत्सना सिंह, जिनके नाम से मची चर्चा
ज्योत्सना सिंह प्रतापगढ़ की ही रहने वाली हैं और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय चेहरा हैं। उन्होंने एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और 2016 में समाजवादी पार्टी का दामन थामा। उनके पिता राजकुमार सिंह भी राजनीति से जुड़े रहे हैं और सदर सीट से पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। (Akhilesh Yadav Kunda Seat) यही वजह है कि ज्योत्सना का नाम आते ही लोगों को लगता है कि सपा किसी मजबूत चेहरे को आगे बढ़ा सकती है।
Also Read –Shiv Thakare Marriage: शिव ठाकरे ने कर ली शादी सोशल मीडिया पर शेयर की फ़ोटो, जाने कौन है दुल्हनिया?
‘कुंडा में कुंडी’ का नारा और बदली रणनीति
पिछले चुनाव में अखिलेश यादव ने “कुंडा में कुंडी लगाओ” का नारा दिया था। इसका साफ मतलब था कि सपा राजा भैया के प्रभाव को तोड़ना चाहती है। तब भले ही सफलता नहीं मिली, लेकिन माना जा रहा है कि उसी समय से पार्टी ने प्रतापगढ़ में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी थी।















