Bangladesh Hindu minority attack: बांग्लादेश से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। रात के सन्नाटे में एक युवक रोज़ की तरह घर लौटने निकला था, उसे क्या पता था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। पड़ोसी मुल्क में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने अब लोगों की चिंता और डर दोनों को और गहरा कर दिया है।
यह घटना बांग्लादेश के चटगांव जिले के डागनभुइयां इलाके की है, जहां 11 जनवरी की रात 28 वर्षीय हिंदू युवक समीर दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई। समीर पेशे से ऑटो चालक था और रोज़ की तरह काम करके घर लौट रहा था। (Bangladesh Hindu minority attack) तभी हमलावरों ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। हमला इतना खौफनाक था कि समीर की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी उसका ऑटो भी लूटकर फरार हो गए।
Bangladesh Hindu minority attack: सुनियोजित लग रही है वारदात
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, समीर का शव उपजिला अस्पताल के पास से बरामद किया गया। (Bangladesh Hindu minority attack) शुरुआती जांच में यह मामला सुनियोजित हत्या का लग रहा है। पुलिस का कहना है कि हमलावरों की पहचान के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है और पीड़ित परिवार की ओर से एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद डर और गुस्सा दोनों का माहौल है।
25 दिन में कई हत्याएं, बढ़ती चिंता
यह कोई अकेली घटना नहीं है। (Bangladesh Hindu minority attack) बीते 25 दिनों में बांग्लादेश में कई हिंदू युवकों की हत्या हो चुकी है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ ही दिन बाद 25 दिसंबर को अमृत मंडल की भी जान ले ली गई। लगातार हो रही इन घटनाओं ने हिंदू समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है।
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अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले
करीब 17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में 2024 से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। (Bangladesh Hindu minority attack) इस्लामिक कट्टरपंथ के उभार के साथ ही हिंदू, बौद्ध और ईसाई जैसे अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले बढ़े हैं। मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल ने इन घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि जैसे-जैसे फरवरी में राष्ट्रीय चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सांप्रदायिक हिंसा भी तेज होती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठे सवाल
भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की कड़ी आलोचना की है। वहीं बांग्लादेश के अंतरिम नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने इन आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की बात कही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर नई घटना के साथ डर और असुरक्षा का माहौल और गहरा होता जा रहा है।














