Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा में सत्ता गंवाने और 58 विधायकों की बगावत का सामना करने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सामने एक और बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। यहां पार्टी के संसदीय दल में बड़ी टूट की चर्चा तेज हो गई है। खबर है कि अगले सप्ताह की शुरुआत में जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचेंगे, उसी दौरान पार्टी के कम से कम 22 सांसद बगावत का ऐलान कर सकते हैं। (Bengal Politics) बताया जा रहा है कि यह सांसद खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने की तैयारी में हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
Bengal Politics: काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी गुट
मिल रही जानकारी के अनुसार संसद में संभावित इस राजनीतिक तख्तापलट का नेतृत्व बारासात से लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। (Bengal Politics) बागी खेमे में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसद शामिल बताए जा रहे हैं। (Bengal Politics) सूत्रों का दावा है कि दोनों सदनों को मिलाकर 22 सांसदों का समर्थन बागी गुट के साथ जुड़ चुका है और अब वे औपचारिक कदम उठाने की तैयारी में हैं।
दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं शुभेंदु अधिकारी
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य दिल्ली में मौजूद हैं।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद लगातार उनसे संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अब बीते समय की बात हो चुकी है और निकट भविष्य में वह इतिहास के एक छोटे अध्याय तक सिमट कर रह जाएगी।
TMC सांसदों के फोन बंद मिलने से बढ़ीं अटकलें
यहां तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी संभावित टूट की पुष्टि करते हुए कहा है कि संसदीय दल का बिखराव अब लगभग तय माना जा सकता है और यह सिर्फ समय की बात है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को जब कई सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो 16 में से 15 सांसदों के फोन लगातार बंद मिले। (Bengal Politics) इन सांसदों में मनोरंजन जगत से जुड़े चेहरे, पूर्व खिलाड़ी और पहली बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे सांसद भी शामिल बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात का प्रयास करने वाले तीन सांसद भी इस बागी गुट का हिस्सा बन चुके हैं।
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बीजेपी का दावा, कई सांसद लगातार संपर्क में
वहीं इधर भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव लॉकेट चटर्जी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। (Bengal Politics) उन्होंने कहा कि 4 मई के चुनाव परिणाम आने के बाद से कई सांसद लगातार उनके संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप और फोन कॉल के जरिए लगातार बातचीत हो रही है और कई सांसद राजनीतिक पाला बदलने की इच्छा जता रहे हैं।
दो-तिहाई समर्थन जरूरी
आपको बताते चलें कि संसद में किसी भी विभाजन को आधिकारिक मान्यता दिलाने और दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी गुट को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।
हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 28 सदस्य हैं, जबकि राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसद हैं। ऐसे में बागी गुट को लोकसभा में कम से कम 19 सांसदों और राज्यसभा में 9 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। सूत्रों के मुताबिक दोनों सदनों को मिलाकर 22 सांसदों का समर्थन पहले ही जुटाया जा चुका है।
अध्यक्ष और सभापति से मिलने की तैयारी
बागी गुट से जुड़े एक प्रमुख सूत्र ने दावा किया है कि सोमवार को यह सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इस दौरान वे खुद को असली तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे। सूत्रों का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो यह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
काकोली घोष दस्तीदार का रहस्यमय संदेश
वहीं संभावित बगावत की मुख्य चेहरा मानी जा रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने इस पूरे विवाद पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। (Bengal Politics) उनका फोन लगातार बजता रहा लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
हालांकि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के एक कथन और चार्ल्स मैके की कविताओं का उल्लेख करते हुए अपनी चार दशक लंबी राजनीतिक यात्रा का जिक्र किया।
इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में लिखा कि ततैया के छत्ते में हाथ मत डालो। उनके इस संदेश को राजनीतिक हलकों में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
विपक्ष के नेता का तंज
कोलकाता में बागी गुट के नेता और हाल ही में नियुक्त नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसा। (Bengal Politics) उन्होंने कहा कि उन्हें किसी काम से पांच सांसदों से संपर्क करना था, लेकिन सभी के फोन एक साथ बंद मिले। उन्होंने कहा कि अब इसका जो मतलब निकालना है, लोग निकाल सकते हैं।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि डर संक्रामक होता है, लेकिन साहस भी संक्रामक होता है। उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
हो सकता है बड़ा राजनीतिक धमाका
वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि बागी सांसद सोमवार को अपने कदम को अंतिम रूप देते हैं तो यह तृणमूल कांग्रेस के इतिहास की सबसे बड़ी संसदीय टूट साबित हो सकती है।
सबकी निगाहें अब उस समय पर टिकी हैं जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली पहुंचेंगे। उसी दौरान संसद में होने वाली संभावित बगावत और असली तृणमूल कांग्रेस के दावे को लेकर देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।















