Faridabad Bulldozer Action: हरियाणा के फरीदाबाद में बुधवार सुबह नेहरू कॉलोनी में बड़ा बुलडोजर अभियान शुरू हो गया। यहां नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची और अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान छह जेसीबी और एक बड़ी तोड़फोड़ मशीन की मदद से मकानों को गिराया जा रहा है। इस कार्रवाई के बीच प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग उठाते हुए प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल अधिकारियों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अभियान के दौरान कुल कितने मकानों को हटाया जाएगा।
Faridabad Bulldozer Action: पुलिस छावनी में तब्दील रहा पूरा इलाका
यहां बुधवार सुबह करीब सात बजे जैसे ही नगर निगम का अभियान शुरू हुआ, पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन ने नेहरू कॉलोनी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों को पूरी तरह बंद कर दिया।
वहीं मेट्रो रोड, सैनिक कॉलोनी, बिजली दफ्तर मार्ग, मुल्ला होटल क्षेत्र और तारण नंबर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। रास्ते बंद होने की वजह से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दफ्तर और अन्य कामों के लिए निकलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ा।
भारी मशीनों के साथ चलाया जा रहा अभियान
यहां नगर निगम की टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची। अवैध निर्माण हटाने के लिए छह जेसीबी और एक बड़ी तोड़फोड़ मशीन को लगाया गया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
वहीं कार्रवाई के दौरान नगर निगम और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की अपील भी की है।
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वर्षों से बसी बस्ती पर कार्रवाई से बढ़ी चिंता
गौरतलब हो कि, नेहरू कॉलोनी को पुनर्वास विभाग की भूमि पर विकसित हुई बस्ती माना जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां करीब दस हजार मकान बने हुए हैं और लगभग पांच लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वर्षों से बड़ी संख्या में परिवार यहां निवास कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष पुनर्वास विभाग की ओर से निवासियों को नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि नोटिस के बाद कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। अब करीब एक वर्ष बाद नगर निगम ने दोबारा अभियान शुरू कर दिया है, जिससे हजारों परिवारों में अपने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
SC के आदेशों का हवाला दे रहा प्रशासन
वहीं नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार अदालत ने सड़कों, सार्वजनिक भूमि और ग्रीन बेल्ट पर किए गए अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हुए हैं।
वहीं प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक है। साथ ही क्षेत्र में विभिन्न विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी भूमि खाली कराना जरूरी है। निगम अधिकारियों का दावा है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
पुनर्वास की मांग को लेकर उठे सवाल
वहीं इस कार्रवाई से प्रभावित लोगों का कहना है कि इससे पहले क्षेत्र में बने धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है और संबंधित भूमि को भी खाली कराया जा चुका है। अब लोगों का सवाल है कि आवासीय मकानों को तोड़ने से पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध करा दी जाए तो वे मकान खाली करने के लिए तैयार हैं। मंगलवार को प्रभावित परिवारों का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से भी मिला था और पुनर्वास की मांग रखी थी।
निवासियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते समय विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई जारी है और प्रभावित परिवार प्रशासन से पुनर्वास को लेकर स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं।















