Governor Reshuffle: इसी महीने के अंत से दो चार दिन पहले केंद्र सरकार अपने पांच राज्यों में राज्यपालों की तैनाती में फेरबदल करने जा रही है। जिन राज्यों में राज्यपालों के उलट फेर की चर्चा है, उनमें जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, उत्तराखंड, तमिलनाडु व असम के नाम शामिल हैं।
Governor Reshuffle: पूरा हो चुका है मनोज सिन्हा का कार्यकाल
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा का पांच साल का कार्यकाल अगस्त,2025 में समाप्त हो गया था। और वे तक़रीबन एक साल से इस पद पर बने हुए हैं।मनोजसिन्हा उतर प्रदेश से आते हैं। वह मोदी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं, इन्हें नरेंद्र मोदी के पसंदीदा नेताओं में माना जाता है। (Governor Reshuffle) भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो मनोज सिन्हा को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया जाना तक़रीबन तय है। कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत भाजपा द्वारा तय 75 वर्ष की आयु सीमा पार कर चुके हैं। अब वे 78 साल के हैं और इसी साल जुलाई में उनका कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
तमिलनाडु में पूर्णकालिक राज्यपाल ही नहीं
तमिलनाडु में कोई पूर्णकालिक राज्यपाल नहीं है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। (Governor Reshuffle) वे भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा गोवा विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं। 2021–2023 में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे। 2023–2025 में ये बिहार के राज्यपाल रहे। फिलहाल, 2 जनवरी, 2025 से केरल के राज्यपाल हैं।
उत्तराखंड में जनरल गुरमीत सिंह
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह इस समय उत्तराखंड के राज्यपाल हैं। ये भारतीय सेना के उन वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने लगभग 40 वर्ष सेना में सेवा देने के बाद संवैधानिक पद सँभाला।
बेबी रानी मौर्य के बाद जनरल गुरमीत सिंह ने सितम्बर, 2021 में राज्यपाल का पदभार ग्रहण किया था। यदि गवर्नर पद की सामान्य अवधि पाँच साल मानी जाए तो उनका कार्यकाल सितम्बर 2026 में पूरा होता है।हालांकि संवैधानिक रूप से राज्यपाल राष्ट्रपति की इच्छा तक पद पर बने रह सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सेना में रहते हुए उनकी तैनाती बनबसा (चम्पावत) क्षेत्र में भी रही थी। इसलिए राज्यपाल बनने से पहले भी वे उत्तराखंड की भौगोलिक और सामरिक परिस्थितियों से परिचित थे।
वे अतिरिक्त महानिदेशक सैन्य संचालन, एडजुटेंट जनरल, रणनीतिक महत्व वाली XV कोर (श्रीनगर) के कोर कमांड, उप सेनाध्यक्ष जैसे पदों पर रहे। (Governor Reshuffle) विशेष रूप से वे भारत-चीन सीमा मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने चीन से जुड़े सैन्य और रणनीतिक संवादों में भारत का प्रतिनिधित्व किया हुआ है।
असम की स्थिति
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जुलाई 2024 से इस पद पर कार्यरत हैं। (Governor Reshuffle) फरवरी 2023 में उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। यह उनका पहला संवैधानिक पद था। इसके बाद 30 जुलाई 2024 को उन्हें असम का राज्यपाल बनाया गया। कुछ समय तक उनके पास मणिपुर का अतिरिक्त प्रभार भी रहा।
इनकी पहचान एक शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और संगठनकर्ता के रूप में बनी, उसके बाद वे सक्रिय राजनीति में आए।नसाहित्य रत्न (हिंदी) की तालीम पाये आचार्य ने 1973-74 में उन्होंने वाराणसी के भारतीय शिशु मंदिर में अध्यापक के रूप में काम शुरू किया।
राम मंदिर आंदोलन और भाजपा के विस्तार के दौर में वे सक्रिय राजनीति में आए। उन्होंने भाजपा के संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य किया। Governor Reshuffle) उन्होंने पूर्व सैनिकों की कहानियों को स्कूलों तक पहुंचाने की एक पहल भी शुरू की, जिसे राजभवन की एक विशिष्ट पहल माना गया।
कितना होता है राज्यपाल का कार्यकाल?
संविधान के अनुसार राज्यपाल का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। लेकिन ये भी कहा गया है कि राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर बने रहते हैं। अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति तक राज्यपाल कार्य जारी रख सकते हैं।















