प्रेस नोट जारी: उत्तर प्रदेश की सरकार और केंद्र की सरकार ने किसानों की आय को 2022 में दोगुनी करने का वादा किया था। आज तक सरकार की ओर से ना कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया कि किसान की आय कितने गुना बढ़ गई है यहां तक यह भी नहीं कहा गया कि कोई भी किसान आज की डेट में घाटे की किसानी नहीं कर रहा है। पेराई सत्र के 2 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने गन्ने का रेट घोषित नहीं किया और पिछला बकाया का भी पैसा किसानों को नहीं दिया गया। (प्रेस नोट जारी) उत्तर प्रदेश में किसानों की फसलों 100 प्रतिषत एम०एस०पी० पर नहीं खरीदी जा रही है। जबकि दिल्ली में कृषि आंदोलन के दौरान प्रमुख सचिव संजय अग्रवाल ने या लिख कर दिया था की एमएसपी कानून लागू किया जाएगा लेकिन एम०एस०पी० गारंटीड कानून आज भी लागू नहीं किया गया। सरकार के द्वारा यह भी कहा गया था कि हम किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराएंगे जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे महंगी बिजली है पंजाब और हरियाणा के तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी किसानों को मुफ्त बिजली दी जाए। लेकिन यहां पर सरकार नलकूपों पर भी मीटर लगाने पर आमादा है। किसान खाद के लिए परेशान है आवारा पशुओं को लेकर किसानों ने आंदोलन किया लेकिन सरकार ने उसका कोई ठोस समाधान नहीं निकाला। किसानों के कटीले तार पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ में उन पर मुकदमा लिखने का प्रावधान भी कर दिया गया। किसानों की सवारी कृषि का यंत्र ट्रैक्टर पर भी रोक लगा दी गई क्या ट्रैक्टर सड़कों पर नहीं चल सकता है। ट्रैक्टर से रोड टैक्स लिया जाता है तो उसको रोड पर चलने का अधिकार क्यों नहीं। किसानों के सवारी का साधन ट्रैक्टर है और ट्रैक्टर पर रोक लगाकर सरकार ने किसान विरोधी होने का सबूत दिया है।
आपको बता दे की आज उत्तर प्रदेश में किसानों को जब उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है तो उद्योग धंधों में काम करने वाले किसानो के बच्चों को उचित वेतन कैसे मिलेगा यह एक बड़ा प्रश्न है । लखनऊ में नगर निगम आवास विकास और लखनऊ विकास प्राधिकरण के द्वारा लखनऊ में अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है लेकिन 2015 से आज तक सर्किल रेट नहीं बढ़ाया गया।
ऐसे में किसान से उसकी जमीन छीनने का है। यह समय है अपनी फसल और नस्ल बचाने का इसलिए किसान समय-समय पर आंदोलन करते रहते हैं अधिकारियों को भी समय-समय पर ज्ञापन के माध्यम से किसानों द्वारस प्रषासन को अवगत कराया जाता है लेकिन अधिकारी समस्याओं का समाधान तो दूर फोन तक नहीं उठाते फोन तक नहीं उठाते है। लखनऊ की तहसीलों में पर्याप्त भ्रष्टाचार व्याप्त है कोई भी अधिकारी किसान का काम नहीं करना चाहता है। ऐसे में किसान के सामने फसल और नस्ल बचाने की करो या मरो की स्थिति है। इसलिए सर्वसम्मति से जनपद के किसानों ने यह निर्णय लिया है कि होने वाली 10 को इन्वेस्टर सम्मिट जी 20 का विरोध करके आने वाले मेहमानों का रास्ता रोककर उनसे अपने गन्ने का रेट गन्ने का भुगतान, एम०एस०पी० का वादा, कटीले तारों पर प्रतिबंध, ट्रैक्टर पर रोक, महंगी बिजली और भूमि अधिग्रहण आदि समस्याओं से अवगत कराएंगे क्योंकि अधिकारी तो सुन नहीं रहे। इस इन्वेस्टर सम्मिट में किसानों से जमीन लेकर व्यापारियों को दी जाएगी लेकिन प्रशासन ने एक बार भी किसानों से बात करने की कोशिश नहीं की और ना ही किसानों के साथ बैठकर कोई संवाद किया है ऐसे में प्रशासन का तानाशाही रवैया देखकर किसानों ने इस इन्वेस्टर सम्मिट का विरोध करने का फैसला लिया है। किसानों के साथ अन्याय करने का एक फिर से बड़ा प्लान बनाया गया।













