Sitapur: जहांगीराबाद(सीतापुर)। हवन, पूजन व मंत्रोच्चार के बीच केवानी नदी के तट पर श्री राधाकृष्ण आश्रम में विगत सात दिनों से चल रही श्री विष्णु महायज्ञ का पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह आयोजन गत 10 जून से शुरू हुआ था जो रविवार 16 जून को पूर्णाहुति और विशाल भण्डारे के साथ समाप्त हो गया।भण्डारे में देर रात तक लोगों ने प्रसाद छका।
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इस अवसर पर प्रतिदिन यज्ञ पूजन, हवन,आरती एवं परिक्रमा के अलावा गत शनिवार को नव निर्मित मंदिर में श्री शनि देव की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करायी गयी। इस मौके पर तमाम भक्तों ने दीपदान किया।एक साथ हजारों की संख्या में प्रज्वल्लित दीपक स्थान की शोभा बढ़ा रहे थे। (Sitapur) इसके साथ ही भारी संख्या में कस्बा तथा क्षेत्र के अनेक गांवों की श्रद्धालु महिला, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहकर भंडारे का महाप्रसाद ग्रहण किया। फूलों की होली के साथ सात दिवसीय कार्यक्रम का समापन हो गया।

यज्ञाचार्य नीरज कृष्ण शास्त्री ने यज्ञ के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि यज्ञ मनुष्य की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है। (Sitapur) यज्ञ आयोजक महंत बाबा विशम्भरदास उर्फ बनिया बाबा ने कहा यज्ञ का धूम बादलों में जाकर खाद बनाकर वर्षा के माध्यम से पृथ्वी पर आता है। त्याग, समर्पण और शुभ कर्म अपने प्रिय खाद्य पदार्थों एवं मूल्यवान, सुगंधित, पौष्टिक द्रव्यों को अग्नि तथा वायु के माध्यम से समस्त संसार के कल्याण के लिए यज्ञ द्वारा वितरित किया जाता है एवं यज्ञ में प्रयुक्त होने वाली तमाम सुगंधित सामग्रियों से उठने वाले धुएं से वातावरण शुद्ध होता है जिससे समस्त व्याधियां नष्ट हो जाती हैं।

वायु शोधन से आरोग्यवर्धक सांस लेने का अवसर मिलता है। (Sitapur) वर्षा के जल के साथ जब वह पृथ्वी पर आता है तो उससे परिपुष्ट अन्न ,घास तथा वनस्पतियां उत्पन्न होती हैं। जिनके सेवन से मनुष्य तथा पशु पक्षी सभी परिपुष्ट होते हैं।यज्ञाग्नि के माध्यम से शक्तिशाली मंत्रोच्चार के ध्वनि कंपन,सुदूर क्षेत्र में बिखर कर लोगों का मानसिक परिष्कार करते हैं। फल स्वरुप शरीरों की तरह मानसिक स्वास्थ्य भी बढ़ता है।
यज्ञमान दिनेश रस्तोगी, संजीव रस्तोगी, राजेश जायसवाल, शिव कुमार गुप्ता,मास्टर वीरेन्द्र कुमार व गीतेश जायसवाल ने सपत्नीक प्रतिदिन वैदिक विधान से यज्ञशाला में हवन पूजन आरती आदि कार्यक्रम संपादित किये। भक्तों, महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने यज्ञ मण्डप की परिक्रमा कर अपने को धन्य किया। (Sitapur) इस दौरान प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्तगण कार्यक्रम में शामिल होते रहे। पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारा हुआ जिसमें हजारों भक्तों ने भंडारे का प्रसाद छका।














