बिहार सरकार के कई विभागों में पिछले 2 दशक से सेवा देने वाले 20 हजार से अधिक डेटा ऑपरेटर बिना किसी सेवा शर्त के काम कर रहे हैं. पिछले कई महीनों से सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों और मंत्रियों से ये डेटा ऑपरेटर गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी है. डेटा ऑपरेटरो में संविदा पर कार्यरत इन कर्मियों ने शिक्षकों और पुस्तकलाध्यक्षों के लिए सेवा शर्त बनाए जाने के बाद बेल्ट्रॉन के माध्यम से सरकारी कार्यालयों में कार्यरत डॉटा इंट्री ऑपरेटरों के लिए भी सेवा शर्त और नियमावली बनाए जाने की मांग की है.
इसको लेकर बिहार राज्य डॉटा इंट्री/कंप्यूटर ऑपरेटर संघ द्वारा शिक्षा मंत्री से मुलाकात भी की गई है. डेटा ऑपरेटर प्रभात कुमार का कहना है कि विभागों, कार्यालयों और संस्थानों में पिछले 20 वर्षों से बेल्ट्रॉन के माध्यम से डॉटा इंट्री ऑपरेटर/कंप्यूटर ऑपरेटरों की सेवाएं ली जा रही हैं. सरकार के अति गोपनीय शाखाओं और सरकार के महत्वपूर्ण काम करने के बाद भी हम उपेक्षित हैं. हमारी सेवा की अनिश्चितता बनी हुई है. डेटा ऑपरेटर विशाल कुमार ने बताया कि अभी जो नए संवर्ग में बहाली हो रही है डेटा ऑपरेटर संघ ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनकी भी सेवा शर्त बनाई जाए जिससे मुख्य धारा में जुड़ सके. बिहार के लगभग सभी विभागों में ये ऑपरेटर संविदा पर अपनी सेवा दे रहे हैं. इस वर्ग के कर्मचारी को फिलहाल 22 हजार रुपए मिलते हैं. इन लोगों को शुरुआत में 6000 हजार रुपए मिलते थे, जबकि जो लोग नए संवर्ग में बहाल होकर नौकरी में आये हैं उनको साढ़े 17 हजार रुपसे से ही वेतन मिलना शुरू हुआ है. ऐसे में पुराने लोगों का यही कहना है कि जो वेतन/मानदेय नए संवर्ग को मिल रहा है













