Deepfake Rules: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सशक्तिकरण करने वाले हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल नुकसान पहुंचाने, समाज में टेंशन पैदा करने, अव्यवस्था पैदा करने और हिंसा फैलाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डीपफेक भारतीय इंटरनेट यूजर्स के लिए एक बहुत ही जरूरी, स्पष्ट और वर्तमान खतरा है।
चंद्रशेखर ने कहा, “हमने पहले ही बहुत मेहनत की है और अप्रैल 2023 में आईटी नियमों को तैयार किया। (Deepfake Rules) हम एक ढांचा बनाने वाले हैं, लेकिन ये यहीं तक सीमित नहीं होने वाला है। अगर जरूरत पड़ी तो नया कानून भी बनाया जाएगा, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि बड़े पैमाने पर डीपफेक या भ्रामक जानकारी पैदा न हो पाए। इंटरनेट पर मौजूद 1.2 अरब भारतीयों की सुरक्षा और विश्वास के लिए ऐसा किया जा रहा है।”
इधर, आईटी मंत्रालय ने 20 नवंबर को उन सभी सोशल मीडिया कंपनियों से बैठक करने का फैसला किया है, जिनके भारत में 5 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। इन सोशल मीडिया कंपनियों में गूगल, मेटा जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। (Deepfake Rules) दो दिन पहले ही आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि उनका मंत्रालय डीपफेक पर चर्चा के लिए बैठक करने वाला है। ये बैठकें गुरुवार (23 नवंबर) और शुक्रवार (24 नवंबर) को होने वाली हैं। ये बैठक रेल भवन में होने वाली है।
Deepfake Rules: नए कानून के संभावित प्रावधान
डीपफेक सामग्री को बनाने, शेयर करने या प्रसारित करने पर सख्त सजा
भ्रामक सूचनाओं को फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
सोशल मीडिया कंपनियों पर डीपफेक और भ्रामक सूचनाओं की रोकथाम का दायित्व
नए कानून के संभावित प्रभाव
डीपफेक और भ्रामक सूचनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
इंटरनेट पर लोगों की सुरक्षा और विश्वास बढ़ेगा।
सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सजग होना होगा।
डीपफेक और भ्रामक सूचनाएं इंटरनेट की एक गंभीर समस्या हैं। इनसे लोगों को नुकसान पहुंच सकता है और समाज में अशांति फैल सकती है। केंद्र सरकार द्वारा नए कानून लाने की पहल एक सकारात्मक कदम है। इससे डीपफेक और भ्रामक सूचनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।











