SP wedding controversy: समाजवादी पार्टी के भीतर इन दिनों एक शादी का कार्ड चर्चा का विषय नहीं, बल्कि सियासी युद्ध का मैदान बन गया है। मुरादाबाद के दो दिग्गज नेताओं के बीच मचे इस घमासान ने पार्टी की साख को दांव पर लगा दिया है। मामला इतना बढ़ गया कि लखनऊ से फटकार आने के बाद स्थानीय नेतृत्व को आनन-फानन में सख्त गाइडलाइन जारी करनी पड़ी। आखिर एक शादी के न्योते ने कैसे अखिलेश यादव की पार्टी में ‘अनुशासन’ की धज्जियां उड़ा दीं? क्यों एक पूर्व सांसद को यह कहना पड़ा कि “मेरे नेता सिर्फ अखिलेश हैं”? आइए जानते हैं मुरादाबाद के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की पूरी इनसाइड स्टोरी।
SP wedding controversy: शादी का न्योता और रुचिवीरा का तीखा हमला
विवाद की शुरुआत तब हुई जब पूर्व सपा सांसद डॉ. एसटी हसन की बेटी की शादी के आयोजन में वर्तमान सांसद रुचिवीरा को आमंत्रित नहीं किया गया। रुचिवीरा ने इस मुद्दे को लपकते हुए डॉ. हसन की मानसिकता पर सवाल खड़े कर दिए। (SP wedding controversy) उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पूर्व सांसद ने अपनी बेटी की शादी में बीजेपी के दिग्गज नेताओं को तो बुलाया, लेकिन अपनी ही पार्टी की सांसद को नजरअंदाज कर दिया। रुचिवीरा यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने यह तक कह दिया कि इससे साफ पता चलता है कि लोकसभा चुनाव के दौरान डॉ. हसन का रुख क्या रहा होगा। इस बयान ने सपा के भीतर खेमेबाजी को हवा दे दी और सोशल मीडिया पर समर्थकों के बीच जंग छिड़ गई।
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डॉ. एसटी हसन का पलटवार
रुचिवीरा के आरोपों पर डॉ. एसटी हसन ने भी चुप्पी तोड़ी और करारा जवाब दिया। उन्होंने साफ किया कि बेटी की शादी एक निजी और सामाजिक आयोजन था, जिसमें उन्होंने सभी दलों के उन लोगों को बुलाया जिनसे उनके व्यक्तिगत संबंध हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तक को न्योता भेजा गया था और उनका शुभकामना पत्र भी प्राप्त हुआ। (SP wedding controversy) डॉ. हसन ने अपनी वफादारी साबित करते हुए कहा कि “पार्टी में मेरे नेता सिर्फ अखिलेश यादव हैं।” हालांकि, उन्होंने आजम खान का जिक्र करते हुए यह भी याद दिलाया कि जहाँ 2019 में टिकट दिलाने में आजम खान की भूमिका थी, वहीं इस बार टिकट कटवाने में भी उन्हीं का हाथ रहा।
सोशल मीडिया पर ‘सस्ती लोकप्रियता’ और जिलाध्यक्ष की चेतावनी
पार्टी के भीतर बढ़ती इस बयानबाजी और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को देखते हुए जिलाध्यक्ष जयवीर यादव ने रविवार को कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। (SP wedding controversy) उन्होंने नेताओं को फेसबुक और व्हाट्सऐप पर एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलने के बजाय आगामी चुनाव की तैयारियों में जुटने की सलाह दी। जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि किसी को कोई शिकायत है, तो वह सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत कराए, न कि सोशल मीडिया पर पार्टी की बदनामी करे। उन्होंने साफ कहा कि “स्वर्गीय नेताजी मुलायम सिंह यादव के आदर्शों को मानने वाले लोग इस तरह की हरकतें तुरंत बंद करें।”
पोस्टर-बैनर के लिए नई ‘सर्किल’ और प्रोटोकॉल
सिर्फ जुबानी जंग ही नहीं, बल्कि अब मुरादाबाद में सपा के पोस्टर और बैनरों के लिए भी नई गाइडलाइन तय कर दी गई है। जिलाध्यक्ष ने फरमान जारी किया है कि अब जिले में कोई भी होर्डिंग या फ्लैक्सी बिना प्रोटोकॉल के नहीं लगेगी। (SP wedding controversy) किसी भी प्रचार सामग्री में जिले के वर्तमान सांसद और विधायक की फोटो लगाना अनिवार्य होगा। (SP wedding controversy) माना जा रहा है कि यह कदम गुटबाजी को खत्म करने और वर्तमान सांसद रुचिवीरा के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव की यह ‘डोज’ सपा के इन दो दिग्गजों के बीच की कड़वाहट को कम कर पाती है या नहीं।















