UP BJP Councillor List Dispute: भारतीय जनता पार्टी की जिला इकाइयों और नामित पार्षदों की नई सूची जारी होने के बाद पार्टी को कई विवादों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से चली आ रही संगठनात्मक प्रक्रिया के बाद घोषित इन सूचियों में ऐसे कई नाम सामने आए हैं, जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं। विरोधियों के साथ-साथ पार्टी के अंदर से भी सवाल उठ रहे हैं कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन नहीं किया गया।
सबसे बड़ा विवाद उन नियुक्तियों को लेकर है, जिनमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को जिम्मेदार पद दिए गए हैं। (UP BJP Councillor List Dispute) अयोध्या में शिवेंद्र सिंह को जिला महामंत्री बनाए जाने के बाद विरोध शुरू हो गया है, क्योंकि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। इसी तरह, इटावा में जितेंद्र गौड़ को महामंत्री बनाए जाने पर भी विवाद गहराया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
लखनऊ में भी एक नियुक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है। (UP BJP Councillor List Dispute) यहां चिंतामणि पांडेय को जिला कार्यकारिणी में मीडिया प्रभारी बनाया गया है, जबकि वे एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। नियमों के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी सक्रिय राजनीति में पद नहीं संभाल सकता, जिससे यह फैसला नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा, पार्टी द्वारा एससी, ओबीसी और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने के दावे भी सवालों के घेरे में हैं। कई जिलों में महिलाओं की भागीदारी 25 प्रतिशत से भी कम बताई जा रही है, जबकि कुछ जगहों पर यह आंकड़ा 10 से 15 प्रतिशत तक सीमित है। जालौन समेत कई जिलों में आरक्षण और संतुलन के नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, बरेली और हरदोई जैसे जिलों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने असंतोष जताया है।
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नामित पार्षदों की सूची ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। अलीगढ़ में विपिन चंचल को पार्षद बनाया गया, जबकि वह पिछले छह महीनों से लापता बताए जा रहे हैं और उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है। (UP BJP Councillor List Dispute) बस्ती में दीपक चौहान, जिन पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, को भी पार्षद बनाया गया है। लखनऊ में एक ही विधानसभा क्षेत्र से कई पार्षदों की नियुक्ति और एक ही वार्ड से कई नाम शामिल किए जाने पर भी पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। इन सभी मामलों ने पार्टी की चयन प्रक्रिया और आंतरिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।















