Varanasi dalmandi market demolition: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी… जहां की तंग गलियों में सदियों का इतिहास साँस लेता है। मगर, इस समय इन्हीं गलियों में विकास का एक ऐसा बुलडोजर चल रहा है जिसने आस्था, व्यापार और विरासत को एक विस्फोटक चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। शहर के हृदय, दलमंडी (Dalmandi) बाजार में इस वक्त ‘विकास’ के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उसने सिर्फ इमारतें ही नहीं तोड़ी हैं, बल्कि कई पीढ़ियों के सपनों और रोजी-रोटी की नींव को भी हिलाकर रख दिया है। काशी विश्वनाथ मंदिर की पहुँच को सुगम बनाने के लिए छेड़ा गया यह अभियान अब एक बड़ा राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक तूफान बन चुका है।
Varanasi dalmandi market demolition: विकास की ‘मॉडल रोड’: क्या है परियोजना का लक्ष्य?
काशी विश्वनाथ धाम में भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए, प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसका मकसद है भीड़भाड़ को कम करना और श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुँचने का एक आसान, चौड़ा विकल्प देना। लगभग 222-224 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट वाली यह परियोजना हाकिम मोहम्मद जाफर मार्ग की मौजूदा 3 से 9 मीटर चौड़ाई को बढ़ाकर एक समान 17.5 मीटर (लगभग 56 फीट) चौड़ी ‘मॉडल रोड’ में बदलने का लक्ष्य रखती है। (Varanasi dalmandi market demolition) यह 650 मीटर लंबी सड़क न केवल यातायात को सुचारु करेगी, बल्कि इसमें चौड़े फुटपाथ और बिजली-सीवेज जैसी भूमिगत आधुनिक उपयोगिताएँ भी शामिल होंगी। इसका प्राथमिक लक्ष्य स्पष्ट है: विश्वनाथ धाम के लिए एक वैकल्पिक और निर्बाध मार्ग प्रदान करना।
उजड़ते आशियाने और ‘पगड़ी सिस्टम’ का दर्द
विकास की इस कीमत का सबसे बड़ा बोझ दलमंडी के निवासियों और व्यापारियों पर पड़ा है। इस 650 मीटर के दायरे में लगभग 187 से 190 इमारतें आई हैं, जिनमें सैकड़ों दुकानें और घर शामिल हैं। (Varanasi dalmandi market demolition) दलमंडी, जो कि मुख्य रूप से मुस्लिम-बहुल थोक बाजार है, सदियों से व्यापार का केंद्र रहा है। विरोध की मुख्य वजह है रोजी-रोटी का विस्थापन। कई व्यापारियों की दुकानें यहाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी ‘पगड़ी सिस्टम’ (किरायेदारी का एक पुराना, अनौपचारिक समझौता) के तहत चल रही हैं। (Varanasi dalmandi market demolition) उनका कहना है कि मुआवजे का वर्तमान मॉडल केवल इमारत मालिकों को लाभ दे रहा है, जबकि किराएदारों और वर्षों से दुकान चला रहे लोगों को कुछ नहीं मिल रहा। वे डर रहे हैं कि अपनी स्थापित जगह, पुराने ग्राहकों और सदियों की बनी साख को खोकर वे कहीं के नहीं रहेंगे। उनकी एक ही मांग है: आस-पास के क्षेत्र में वैकल्पिक दुकानें या बाज़ार उपलब्ध कराया जाए।
‘साझा विरासत’ पर संकट और राजनीतिक आरोप
यह केवल इमारतों को तोड़ने का मामला नहीं है; यह एक शहर की साझा सांस्कृतिक विरासत को मिटाने का भी आरोप है। इतिहासकार और स्थानीय लोग मानते हैं कि दलमंडी का बाज़ार सदियों पुरानी काशी की सामाजिक बुनावट का एक अभिन्न हिस्सा है। इसका विध्वंस एक ऐतिहासिक पहचान को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इस परियोजना पर तीखा हमला बोला है। (Varanasi dalmandi market demolition) सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे एक “राजनीतिक विध्वंस” करार देते हुए सत्तारूढ़ भाजपा पर आरोप लगाया है कि यह उस समुदाय को निशाना बना रहा है जो आमतौर पर उन्हें वोट नहीं देता। भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, विपक्ष पर ‘अवसरवादी राजनीति’ का आरोप लगाया है।
कोर्ट, पुलिस और जारी तनातनी
परियोजना की कानूनी राह भी आसान नहीं रही है। मई 2025 में, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कई संपत्तियों पर ‘यथास्थिति’ (status quo) बनाए रखने का आदेश दिया था, जिसमें प्रशासन को उचित कानूनी प्रक्रिया और मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना आगे न बढ़ने का निर्देश दिया गया। (Varanasi dalmandi market demolition) सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अधिग्रहण कानूनी तरीकों से ही होगा। (Varanasi dalmandi market demolition) पिछले कुछ हफ्तों से, प्रशासन ने उन संपत्तियों पर विध्वंस शुरू कर दिया है, जिनके मालिकों ने मुआवजा स्वीकार कर लिया है और अपनी संपत्ति का सरकारी रजिस्ट्री करा दी है। गलियाँ तंग होने के कारण, पुलिस की भारी सुरक्षा के बीच, बुलडोजर की जगह मजदूरों और हैंड ड्रिल मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।
हालाँकि, विरोध प्रदर्शन जारी हैं। क्षेत्र में ड्रोन निगरानी के साथ भारी पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात हैं। हाल ही में एक सपा नेता को काम में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कई प्रभावित परिवारों ने अपने बच्चों की शादियाँ भी टाल दी हैं। (Varanasi dalmandi market demolition) दलमंडी में इस वक्त ‘विकास’ और ‘विरासत’ के बीच का टकराव अपने चरम पर है, जहां हर गिरती ईंट के साथ एक नई कहानी पैदा हो रही है।















