West Bengal ED Raid: पश्चिम बंगाल राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व दमकल एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस को कथित नगर निगम भर्ती घोटाले के मामले में गिरफ्तार कर लिया। करीब 10 घंटे 30 मिनट तक चली लंबी पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, ईडी अधिकारियों ने कोलकाता स्थित कार्यालय में सुजीत बोस से गहन पूछताछ शुरू की थी। West Bengal ED Raidपूछताछ के दौरान उनके जवाबों में कई तरह की विसंगतियां सामने आईं और एजेंसी ने उन पर जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाया। इसके बाद दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय से मंजूरी मिलने पर रात उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई के दौरान उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसकी जांच की जा रही है।
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West Bengal ED Raid: बिगड़ गई सुजीत बोस की तबीयत
गिरफ्तारी की खबर सुनते ही सुजीत बोस की तबीयत बिगड़ गई। बताया गया कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई, जिसके बाद उनकी पत्नी और बेटी देर रात दवा और भोजन लेकर ईडी कार्यालय पहुंचीं। ईडी की जांच में दक्षिण दमदम नगर निगम में बड़े पैमाने पर अवैध नियुक्तियों का खुलासा हुआ है। आरोप है कि 329 अयोग्य उम्मीदवारों को नियमों को ताक पर रखकर नौकरी दी गई। यह घोटाला सिर्फ ग्रुप C और ग्रुप D तक सीमित नहीं था, बल्कि ड्राइवर, सफाईकर्मी और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्तियों में भी व्यापक अनियमितताएं बरती गईं।
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जांच एजेंसी का दावा है कि अयान शील की कंपनी के माध्यम से ओएमआर शीट में हेरफेर कर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिन उम्मीदवारों को इंटरव्यू में शून्य अंक मिले थे, उन्हें भी नौकरी दे दी गई। आरोप है कि यह सब तत्कालीन चेयरमैन पांचू रॉय और सुजीत बोस के निर्देश पर हुआ। इस मामले में सीबीआई पहले ही पांचू रॉय के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
सुजीत बोस को हाल ही में हुए चुनाव में बिधाननगर सीट से 37,330 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। खराब सड़कें, कचरे के ढेर और जलभराव जैसी समस्याओं को लेकर जनता में उनके खिलाफ नाराजगी देखी गई थी। सुजीत बोस ने राजनीतिक करियर की शुरुआत सीपीएम की युवा इकाई डीवाईएफआई से की थी, लेकिन 2001 में टीएमसी में शामिल हो गए। 2009 में पहली बार विधायक बने और 2021 में मंत्री पद तक पहुंचे। अब उनकी गिरफ्तारी ने बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।















