मीडिया की चकाचौंध से दूर रहने वाले गोवा के पूर्व CM मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर इन दिनों सुर्खियों में है. वजह है टिकट को लेकर घमासान. बीजेपी ने उन्हें पणजी की सीट से टिकट नहीं दिया. लिहाज़ा उत्पल ने बागवती रुख अपनाते हुए इसी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. साथ ही उन्होंने बीजेपी की सदस्यता भी छोड़ दी. हालांकि अभी भी अंदरखाने बीजेपी की तरफ से उन्हें मनाने की कोशिशें की जा रही है. लेकिन उनके बयानों और हाव-भाव लग नहीं रहा है कि वो मानने वाले हैं.
पणजी एक ऐसी सीट है जहां से उनके पिता मनोहर पर्रिकर हमेशा जीतते रहे. साल 1994 से लेकर 2014 तक वो यहां के विधायक रहे. देश के रक्षा मंत्री बनने के चलते उनका पणजी सीट से कुछ समय के लिए रिश्ता टूट गया. हालंकि साल 2017 में वो एक बार फिर से यहां के विधायक बने और साल 2019 में निधन तक वो इस सीट पर काबिज रहे.
गोवा के प्रभारी देवेंद्र फडणवीस ने पिछले दिनों कहा था कि उन्होंने उत्पल पर्रिकर को पणजी के अलावा किसी और दो सीट से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था. लेकिन वो मानने के लिए तैयार नहीं थे. पणजी सीट से बीजेपी ने बाबुश मोनसेराटे को टिकट दिया है. वो इस सीट से बीजेपी के मौजूदा विधायक है. कहा जा रहा है कि बाबुश को इस सीट से इसलिए टिकट दिया गया है क्योंकि उन्होंने साल 2019 में कांग्रेस के 10 विधायकों को बीजेपी में शामिल करवाया था. कहा जा रहा है कि बाबुश, मनोहर पर्रिकर के विरोधी थे.
पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री रहे मनोहर पर्रिकर दो बेटे हैं. उत्पल और अभिजीत. राजनीति में करियर शुरु करने वाले उत्पल अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं. उत्पल की पत्नी उमा सरदेसाई ने भी अमेरिका से पढ़ाई की है. उमा भी यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की स्टूडेंट रह चुकी है.
पिछले दिनों उत्पल ने कहा था कि उनका राजनीति आना सत्ता या पद के बारे में नहीं है. उन्होंने कहा था, ‘मैं विधायक या मंत्री बनने के लिए ऐसा नहीं कर रहा हूं. ये उन मूल्यों के बारे में है जिनके लिए मेरे पिता खड़े थे और ये मेरे लिए उन मूल्यों के लिए खड़े होने का समय है. मैं अपनी पार्टी के साथ बातचीत नहीं कर सकता. मेरे पास यही एकमात्र राजनीतिक मंच है. मैं बहुत बड़ा जोखिम उठा रहा हूं. मुझे पणजी के लोगों का समर्थन है और उन्हें मेरे राजनीतिक करियर के भाग्य का फैसला करने दें.’
स्थानीय लोग मनोहर पर्रिकर को बहुत सम्मान देते हैं, अक्सर राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी ईमानदारी और क्षमता के बारे में कहानियां दोहराते हैं. उनके दोनों बेटों उत्पल और अभिजीत के बारे में कोई ज्यादा नहीं जानता था. मनोहर पर्रिकर नहीं चाहते थे कि उनका बेटा राजनीति में आए. उत्पल ने पिता के देहांत के बाद कहा था, ‘भाई (पर्रिकर) नहीं चाहते थे कि मैं राजनीति में आऊं. इसे पारिवारिक राज नहीं कहा जा सकता. अब मेरे पिता नहीं हैं. मैं एक स्वतंत्र व्यक्ति हूं. मेरी अपनी एक पहचान है.’













